अरपा नदी प्रदूषण मामले में हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- हर नाले का पानी STP तक पहुंच रहा है या नहीं?

बिलासपुर : अरपा नदी में बढ़ते प्रदूषण और शहर की सीवरेज व्यवस्था को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट ने नगर निगम और शासन से विस्तृत जानकारी मांगी है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने शासन को नया शपथ पत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि शहर के करीब 70 नालों से निकलने वाला सीवरेज वास्तव में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) तक पहुंच रहा है या नहीं।
कोर्ट ने खास तौर पर यह जानना चाहा है कि क्या मौजूदा और निर्माणाधीन STP की क्षमता शहर से निकलने वाले पूरे सीवरेज को ट्रीट करने के लिए पर्याप्त है।
70 नालों से रोज निकलता है 72.20 MLD सीवरेज
अरपा नदी के संरक्षण और संवर्धन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान शासन की ओर से प्रस्तुत शपथ पत्र में बताया गया कि बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की आबादी करीब 6 लाख 68 हजार 540 है। शहर में प्रतिदिन लगभग 72.20 एमएलडी सीवरेज उत्पन्न होता है।
इस सीवरेज को सीवरेज नेटवर्क और करीब 70 नालों के जरिए चैनलाइज किया जाता है। अब हाईकोर्ट यह जानना चाहता है कि इन सभी नालों से निकलने वाला गंदा पानी पूरी तरह इंटरसेप्ट होकर STP तक पहुंच रहा है या नहीं।
4 STP की क्षमता 78 MLD, दो और निर्माणाधीन
शासन के अनुसार, वर्तमान में बिलासपुर में चार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 78 एमएलडी है। हालांकि इनका वास्तविक उपयोग फिलहाल करीब 43.90 एमएलडी बताया गया है।
इसके अलावा 16-16 एमएलडी क्षमता वाले दो और STP निर्माणाधीन हैं। इनमें से एक ट्रायल रन के चरण में है, जबकि दूसरे के 31 दिसंबर 2026 तक पूरा होने की संभावना जताई गई है।
दोनों नए प्लांट शुरू होने के बाद शहर की कुल सीवरेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़कर 94 एमएलडी हो जाएगी, जो वर्तमान अनुमानित 72.20 एमएलडी सीवरेज उत्पादन से अधिक है।
कोर्ट का अहम सवाल- क्या हर नाला STP से जुड़ा है?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सिर्फ STP की क्षमता पर ही नहीं, बल्कि उनके वास्तविक कनेक्शन और उपयोग पर भी सवाल उठाया। कोर्ट ने पूछा कि क्या शहर के सभी नालों का सीवरेज वास्तव में STP तक पहुंच रहा है।
डिवीजन बेंच ने अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को नया एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
नए एफिडेविट में देनी होगी पूरी जानकारी
कोर्ट ने कहा है कि शपथ पत्र में स्पष्ट रूप से बताया जाए कि नगर निगम क्षेत्र के सभी 70 नाले, निर्माणाधीन दो STP सहित उपलब्ध छह STP से कवर और कनेक्टेड हैं या नहीं।
इसके साथ ही प्रत्येक नाले से निकलने वाले सीवरेज को इंटरसेप्ट, डायवर्ट और ट्रीट करने की प्रभावी व्यवस्था है या नहीं, इसकी भी जानकारी देनी होगी।
अगर अतिरिक्त STP की जरूरत है तो शासन को उनकी क्षमता, स्थान, निर्माण की समय-सीमा और अरपा नदी में पानी छोड़े जाने से पहले पूर्ण उपचार सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जानकारी भी कोर्ट के सामने रखनी होगी।
17 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
मुख्य सचिव विकासशील की ओर से प्रस्तुत शपथ पत्र में बताया गया कि फिलहाल निर्माणाधीन STP के पूरा होने के बाद उनकी क्षमता और सीवरेज ट्रीटमेंट की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद ही अतिरिक्त STP की आवश्यकता के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी।
हाईकोर्ट ने इस शपथ पत्र को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर 2026 की तारीख तय की है।







