“पद और इंसान अस्थायी, न्यायिक संस्थाएं स्थायी रहें” विदाई पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा का भावुक संदेश

बिलासपुर :  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा अपने विदाई समारोह में भावुक नजर आए। सेवानिवृत्ति के अवसर पर आयोजित समारोह में उन्होंने न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि अदालतें महज ईंट-पत्थर से बनी इमारतें नहीं हैं, बल्कि आम आदमी की उम्मीद और न्याय का पवित्र मंदिर हैं। उन्होंने कहा कि पद और व्यक्ति अस्थायी होते हैं, लेकिन न्यायिक संस्थाएं स्थायी रहनी चाहिए।

चीफ जस्टिस सिन्हा ने न्यायिक संस्थाओं की साख, विश्वसनीयता और निष्पक्षता को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में लोगों का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है और इसे हर परिस्थिति में कायम रखना न्यायिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है।

परिवार को दिया सफलता का श्रेय

सेवानिवृत्ति के बाद शुक्रवार को आयोजित विदाई समारोह में अपने कार्यकाल और अनुभवों को याद करते हुए चीफ जस्टिस सिन्हा ने अपनी सफलता का श्रेय पत्नी शालिनी सिन्हा और परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि परिवार का प्यार, समझदारी और त्याग उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है। हर चुनौती का सामना करने का साहस और मजबूती उन्हें परिवार से मिली।

साढ़े तीन साल में 50,228 मामलों का निपटारा

जस्टिस रमेश सिन्हा ने 29 मार्च 2023 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली थी। तत्कालीन राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन ने उन्हें शपथ दिलाई थी।

करीब साढ़े तीन साल के कार्यकाल के बाद 4 सितंबर 2026 को वे सेवानिवृत्त हुए। इस अवधि में उनके कार्यकाल के दौरान 50,228 मामलों का निपटारा किया गया। इनमें 369 से अधिक नजीर बनने वाले फैसले भी शामिल रहे।

अपने विदाई संबोधन में चीफ जस्टिस सिन्हा ने न्यायपालिका को केवल एक संस्था नहीं, बल्कि आम नागरिक के भरोसे का केंद्र बताया। उन्होंने न्यायिक संस्थाओं की गरिमा और निष्पक्षता को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि व्यक्ति बदलते रहते हैं, लेकिन संस्थाओं की मजबूती और विश्वसनीयता लंबे समय तक बनी रहनी चाहिए।

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