जब 10 साल की उम्र में उठ गया पिता का साया… शिक्षक दिवस पर CM साय ने सुनाई संघर्ष से सफलता तक की कहानी

रायपुर : शिक्षक दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के सभी गुरुजनों के नाम एक आत्मीय पत्र लिखकर उन्हें सादर नमन किया। मुख्यमंत्री ने पत्र में अपने विद्यार्थी जीवन की यादों को साझा करते हुए बचपन के संघर्ष, शिक्षा हासिल करने की कठिनाइयों और बदलती शिक्षा व्यवस्था का भावपूर्ण उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे कक्षा में मौजूद हर बच्चे की प्रतिभा को पहचानें और खासकर उन बच्चों का हाथ थामें, जो अभाव, संकोच या किसी अन्य वजह से पीछे छूट रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज जब वे प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में बच्चों के भविष्य और शिक्षा से जुड़े फैसले लेने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, तब अपने बचपन और विद्यार्थी जीवन के दिन और भी ज्यादा याद आते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन कितना भी आगे बढ़ जाए, अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव कभी कम नहीं होता।

10 साल की उम्र में उठ गया था पिता का साया

मुख्यमंत्री ने अपने बचपन की कठिन परिस्थितियों को याद करते हुए बताया कि उनका जन्म जशपुर जिले के बगिया गांव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उनकी शुरुआती शिक्षा गांव के स्कूल से हुई। करीब 10 वर्ष की उम्र में, जब वे चौथी कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया।

कम उम्र में ही परिवार, खेती और छोटे भाइयों की जिम्मेदारी उनके जीवन का हिस्सा बन गई। गांव में पांचवीं तक पढ़ाई करने के बाद आगे की शिक्षा के लिए उन्हें कुनकुरी जाना पड़ा। यहां उन्होंने लोयोला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक छोटे से कमरे में रहकर पढ़ाई की।

आगे पढ़ने की इच्छा थी, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई रोककर खेती की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी और छोटे भाइयों की शिक्षा को आगे बढ़ाया।

स्लेट-तख्ती से स्मार्ट क्लास तक बदली शिक्षा

मुख्यमंत्री साय ने अपने विद्यार्थी जीवन और आज की शिक्षा व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि समय के साथ शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। जिस पीढ़ी ने स्लेट, तख्ती और चॉक से पढ़ाई शुरू की थी, आज उसी छत्तीसगढ़ के बच्चे स्मार्ट क्लास और डिजिटल माध्यमों से पढ़ रहे हैं।

बच्चों की दुनिया अब किताबों तक सीमित नहीं है। आधुनिक तकनीक के जरिए उन्हें दुनिया भर के ज्ञान तक पहुंच मिल रही है और वे विज्ञान एवं तकनीक के नए अवसरों से जुड़ रहे हैं।

साय ने कहा कि कभी दूरदराज के इलाकों में स्कूल तक पहुंचना भी बड़ी चुनौती थी। आज ऐसे क्षेत्रों में बेहतर स्कूल, आधुनिक संसाधन और नए अवसर बच्चों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

शिक्षक आज भी शिक्षा की सबसे बड़ी ताकत

मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक बच्चों को जानकारी दे सकती है और किताबें उन्हें ज्ञान दे सकती हैं, लेकिन बच्चे के भीतर आत्मविश्वास जगाने, उसकी प्रतिभा पहचानने और उसे बेहतर इंसान बनाने का काम एक संवेदनशील शिक्षक ही कर सकता है।

उन्होंने कहा कि उनके जीवन में भी गुरुजनों से मिली सीख ने कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का साहस दिया। इसी वजह से वे शिक्षक को सिर्फ पाठ पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि जीवन की दिशा दिखाने वाला पथ-प्रदर्शक मानते हैं।

‘कोई बच्चा परिस्थितियों के कारण पीछे न रह जाए’

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि जिन अभावों और कठिनाइयों के कारण कभी बच्चों की पढ़ाई रुक जाती थी, वे आज उनके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें।

उन्होंने कहा कि किसी बच्चे की परिस्थितियां उसके सपनों की सीमा तय नहीं करनी चाहिए। चाहे बच्चा छोटे गांव से हो, वनांचल से हो या किसी दूरस्थ क्षेत्र से, उसे आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बदल रही शिक्षा व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप छत्तीसगढ़ में शिक्षा को अधिक सहज, आधुनिक, व्यावहारिक और बच्चों की प्रतिभा के अनुरूप बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं में सीखने के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। कौशल एवं व्यावहारिक ज्ञान को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास और आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों का विस्तार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बस्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे क्षेत्रों में भी अब विद्यालयों की घंटियां सुनाई दे रही हैं, जहां परिस्थितियों के कारण लंबे समय तक स्कूल बंद रहे थे।

हर बच्चे में छिपी है कोई न कोई प्रतिभा

शिक्षकों को संबोधित करते हुए साय ने कहा कि कक्षा में बैठा हर बच्चा अपने भीतर अनगिनत संभावनाएं लेकर आता है। कोई भविष्य का वैज्ञानिक बन सकता है तो कोई खिलाड़ी, डॉक्टर, किसान, शिक्षक, कलाकार या जनसेवक।

उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे खुद अपनी क्षमता को नहीं पहचान पाते, लेकिन शिक्षक की पारखी नजर उसकी प्रतिभा को पहचान सकती है। शिक्षक के प्रोत्साहन का एक छोटा-सा वाक्य भी बच्चे को पूरी जिंदगी आगे बढ़ने की ताकत दे सकता है।

‘जो पीछे छूट रहा है, उसका हाथ थामिए’

शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री ने गुरुजनों से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि हर बच्चे के भीतर छिपी संभावना को पहचानें और खासकर उस बच्चे का हाथ थामें, जो अभाव में है, संकोच में है या किसी कारण पीछे छूट रहा है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक का थोड़ा सा विश्वास किसी बच्चे की पूरी जिंदगी की दिशा बदल सकता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चे के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, संस्कार और क्षमताओं का विकास करना भी है।

‘हर स्कूल बने सपनों का द्वार’

मुख्यमंत्री साय ने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि मिलकर ऐसा छत्तीसगढ़ बनाया जाए, जहां हर स्कूल सपनों का द्वार बने और हर कक्षा संभावनाओं का संसार।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों के ज्ञान से बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो, उनके संस्कारों से समाज समृद्ध हो और उनके मार्गदर्शन से छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाए।

अंत में मुख्यमंत्री ने शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रदेश के सभी गुरुजनों को सादर नमन करते हुए उनके स्वस्थ, सुखी और यशस्वी जीवन की कामना की। उन्होंने सभी शिक्षकों और उनके परिवारों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

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