सुकमा पुसगुन्ना मुठभेड़ में 02 हार्डकोर माओवादी (01महिला, 01पुरुष) का शव हथियार सहित बरामद

 सुकमा  : पुलिस अधीक्षक सुकमा किरण चव्हाण द्वारा बताया गया कि जिला सुकमा के थाना कूकानार क्षेत्रांतर्गत डुनमपारा पुसगुन्ना के जंगल पहाड़ी इलाके में कटेकल्याण एरिया कमेटी में सक्रिय माओवादियों के उपस्थिति के आसूचना पर दिनांक 11.06.2025 को जिला पुलिस बल एवं डीआरजी की संयुक्त पुलिस पार्टी नक्सल विरोधी सर्च अभियान में रवाना हुए थे।अभियान के दौरान दिनांक 11/06/2025 के शाम 14:00 बजे से माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच लगातार फायरिंग हुई l मुठभेड़ स्थल से 02 हार्डकोर माओवादी (01महिला, 01पुरुष) का शव हथियार सहित बरामद हुआ हैं l
प्रारम्भिक तौर पर मारे गए माओवादी की पहचान एवं 05 लाख ईनामी पेदारास LOS/कमांडर कटेकल्याण एरिया कमेटी (एसीएम) मुचाकी बामन निवासी चिकपाल थाना कटेकल्याण जिला दंतेवाड़ा एवं कटेकल्याण एरिया कमिटी सीनियर पार्टी सदस्या अनीता अवलम निवासी बीजापुर क्षेत्र के रूप में हुई है।
 मुठभेड़ स्थल से बरामद सामाग्री विवरण :- 
01. 01 नग 5.56MM इंसास राइफल।
02. 01 नग भरमार बंदूक।
03. 04 नग जिलेटिन।
 04. 10 नग  डेटोनेटर।
 05. 17 नग इंसास जिंदा कारतूस।
06. 05 राउंड का 12 बोर का जिंदा कारतूस।
07. 01नग साबुन बम।
08. 01 टिफिन बम।
09. वायर ।
10. सेफ्टी फ्यूज।
 11. अन्य नक्सल सामग्री।
 पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज  सुन्दरराज पी. द्वारा बताया गया कि -वर्ष 2024 में नक्सल विरोधी अभियान में प्राप्त बढ़त को आगे बरकरार रखते हुये वर्ष 2025 में भी बस्तर संभाग अंतर्गत सुरक्षा बलों द्वारा प्रभावी रूप से प्रतिबंधित एवं गैर कानूनी सीपीआई माओवादी संगठन के विरूद्ध नक्सल विरोधी अभियान संचालित किये जाने के परिणाम स्वरूप विगत वर्ष 2024-2025 के 17 months  में कुल 411 हार्डकोर माओवादियों के शव बरामद किये गये। सरकार के मंशा के अनुसार और जनता की इच्छा के अनुसार पुलिस मुख्यालय के मार्गदर्शन में बस्तर रेंज में तैनात DRG/STF/CoBRA/CRPF/BSF/ITBP/CAF/ Bastar Fighters & अन्य समस्त सुरक्षा बल सदस्यों द्वारा मजबूत मनोबल एवं स्पष्ट लक्ष्य के साथ बस्तर क्षेत्र की शांति, सुरक्षा व विकास हेतु समर्पित होकर कार्य किया जा रहा है
 पुलिस महानिरीक्षक ने दोहराया कि “संकल्प: नक्सल मुक्त बस्तर मिशन” अब केवल एक सपना नहीं, बल्कि तेजी से साकार होती हुई हकीकत है। एक समय आतंक और हिंसा का प्रतीक रहा माओवादी आंदोलन अब अपने अंतिम दौर में पहुँच चुका है, जबकि शांति और विकास की नई सुबह बस्तर में दस्तक दे चुकी है।

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