कवर्धा में आदिवासियों ने दुर्गा पंडाल उखाड़ा… पुलिस ने लाठीचार्ज किया

कबीरधाम : छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में दुर्गा पंडाल को लेकर दो पक्षों में बवाल हो गया। एक पक्ष ने दुर्गा पंडाल उखाड़ दिया जिससे गुस्साए दूसरे पक्ष के लोगों ने हंगामा मचाया है। मौके पर पहुंची पुलिस के साथ भी लोगों की झूमाझटकी हुई। इसमें गर्भवती महिला आरक्षक का हाथ टूट गया। गांव के लोगों ने एसडीओपी का कॉलर तक पकड़ लिया। झड़प में कई लोग घायल हुए हैं। मौके पर भारी फोर्स तैनात है। गांव में तनाव का माहौल है।

मंदिर पर अधिकार की लड़ाई

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, घटना कबीरधाम जिले के कुकदूर थाना के अंतरगत आने वाले कामठी गांव की है। कामठी में देवी-देवताओं का मंदिर है। गांव के लोग इसमें पूजा करते हैं, लेकिन कुछ वर्षों से मंदिर पर गोडवाना समाज ने अपना अधिकार बताते हुए मंदिर का नामकरण कर दिया है।

गोड़वाना और पटेल समाज आमने-सामनेगोडवाना समाज मंदिर में सतरंगी झंडा लगाकर अपने देवी-देवता होने का दावा कर रहा है। इसे लेकर गोड़वाना समाज और पटेल समाज के बीच तनाव की स्थिति बनी रहती है। इस बार फिर से नवरात्रि की शुरुआत से पहले ही पंडाल स्थापना के साथ ही दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया है।

उखाड़ा दुर्गा पंडालबताया जाता है कि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से जुड़े लोगों ने दुर्गा पंडाल उखाड़ फेंका, जिसके बाद पटेल समाज के लोग आक्रोशित हो गए। गांव में बवाल होने के बारे में जैसे ही पता चला पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। घटना से आक्रोशित लोग पुलिस से भी भिड़ गए।

पुलिस ने किया बल प्रयोगपुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर के भीड़ को तितिर बितिर किया। इसमें दोनों पक्ष के लोगों को चोट आई हैं। पुलिस के पिटाई से एक लड़की की हाथ में चोट आई है। स्थिति को संभालने के लिए जिला मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल भेजा गया है।

मंदिर में मां दुर्गा प्रतिमा स्थापितअधिकारियों के समझाने के बाद तनावपूर्ण शांति कायम है। मंदिर परिसर के गेट में लगाए ताले को पुलिस ने खोल दिया है। मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है। कामठी गांव में आदिवासी समुदाय के लोगों की बड़ी आबादी है।

पटेल और आदिवासी समाज के बीच तनावगांव में एक प्राचीन मंदिर है, जिसमें पहले से देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। गांव के लोग मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। आदिवासी समाज का कहना है कि मंदिर उनके पूर्वजों का बनाया है, इसलिए इस पर उनका अधिकार है। अक्सर गांव के पटेल समाज और आदिवासी समाज के लोगों बीच इसी बात को लेकर तनाव देखा जाता है।

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