UNGA में आमने-सामने भारत-पाकिस्तान, शहबाज शरीफ के बाद पेटल गहलोत ने आतंकवाद पर सुनाई खरी-खरी

न्यूयॉर्क : संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण के बाद भारत ने राइट ऑफ रिप्लाई के तहत जवाब दिया। भारत की संयुक्त राष्ट्र में फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के आतंकवाद, लोकतंत्र, धार्मिक असहिष्णुता, अल्पसंख्यकों के अधिकार और जम्मू-कश्मीर से जुड़े दावों पर सवाल उठाए। गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान के प्रतिनिधि की ओर से महासभा में की गई टिप्पणियां तथ्यों से मेल नहीं खातीं।

ओसामा बिन लादेन का जिक्र कर पाकिस्तान पर निशाना

गहलोत ने अपने जवाब में 9/11 आतंकी हमले का संदर्भ देते हुए ओसामा बिन लादेन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 9/11 हमलों का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में उस सैन्य अकादमी के नजदीक रह रहा था, जिसकी पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने अपने भाषण में प्रशंसा की थी।

भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान के लोकतांत्रिक ढांचे और सेना की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन और देश के वास्तविक सत्ता केंद्र को लेकर भारत की आपत्तियां महासभा के सामने रखीं।

धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर भी घेरा

पेटल गहलोत ने पाकिस्तान में धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस व्यवस्था की ओर से धार्मिक सहिष्णुता की बात की जा रही है, उसके अपने रिकॉर्ड पर भी सवाल उठते रहे हैं।

गहलोत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को लेकर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि सुरक्षा की बात करने के साथ-साथ सीमा पार आतंकवाद जारी रखने की नीति के परिणाम होंगे। भारतीय पक्ष ने आतंकवाद को भारत-पाकिस्तान संबंधों का प्रमुख मुद्दा बताया।

कश्मीर पर भारत ने दोहराया अपना रुख

शहबाज शरीफ ने अपने UNGA भाषण में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में गहलोत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा।

उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) की स्थिति का भी उल्लेख किया और रावलकोट समेत वहां के लोगों के अधिकारों तथा हिंसा से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने की बात कही।

‘आतंकवाद के परिणाम होंगे’

भारत ने अपने जवाब में सीमा पार आतंकवाद को लेकर कड़ा संदेश दिया। गहलोत ने कहा कि भारत ने पहले भी आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की है और अगर पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद जारी रहता है तो उसके परिणाम होंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा को पाकिस्तान को उसके बयानों के बजाय उसके कार्यों के आधार पर देखना चाहिए।

शहबाज शरीफ ने UN में उठाया था कश्मीर और जल का मुद्दा

इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भाषण दिया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ सिंधु नदी के पानी का मुद्दा भी उठाया और कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने या मोड़ने का कोई भी प्रयास पाकिस्तान की नजर में ‘युद्ध की कार्रवाई’ माना जाएगा।

इसके बाद भारत ने राइट ऑफ रिप्लाई के जरिए पाकिस्तान के इन दावों का जवाब दिया। मौजूदा घटनाक्रम में दोनों देशों के बीच कश्मीर, आतंकवाद और सिंधु जल से जुड़े मुद्दे एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र के मंच पर आमने-सामने आए हैं।

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