महानदी जल विवाद पर CM साय का बड़ा बयान, बोले- ‘बहुत जल्द निकलेगा समाधान’

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को भुवनेश्वर में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से उनके आवास पर मुलाकात की। दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच छत्तीसगढ़ और ओडिशा के आपसी सहयोग, विकास, जनकल्याण और दोनों राज्यों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। मुलाकात के दौरान लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल बंटवारा मुद्दे को लेकर भी समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर बात हुई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा पड़ोसी राज्य होने के साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से भी एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। दोनों राज्यों के बीच कई साझा विषय हैं और विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि आपसी संवाद और सहयोग को मजबूत करते हुए इन संभावनाओं को दोनों राज्यों की जनता के हित में आगे बढ़ाने को लेकर मुख्यमंत्री माझी के साथ सकारात्मक चर्चा हुई।

महानदी विवाद पर जल्द समाधान की उम्मीद

महानदी जल विवाद को लेकर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे इस मुद्दे के समाधान के लिए अब सकारात्मक माहौल बना है। हाल ही में नई दिल्ली में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और अधिकारियों की बैठक हुई थी, जिसमें महानदी जल बंटवारे के मुद्दे पर केंद्रीय जल आयोग के माध्यम से आगे बढ़ने को लेकर सहमति बनी थी।

साय ने कहा कि दोनों राज्य केंद्रीय जल आयोग के निर्णय को स्वीकार करने पर सहमत हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार के सहयोग और दोनों राज्यों की सकारात्मक पहल से महानदी जल विवाद का समाधान जल्द निकल सकता है।

दोनों राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच केवल भौगोलिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक संबंध भी गहरे हैं। ऐसे में दोनों राज्यों के बीच संवाद और सहयोग को और मजबूत करने से विकास की नई संभावनाएं सामने आ सकती हैं।

वहीं, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी मुलाकात को सार्थक बताते हुए दोनों राज्यों के बीच सहयोग मजबूत करने और जनता के विकास एवं कल्याण से जुड़े साझा प्रयासों को आगे बढ़ाने की बात कही।

महानदी जल बंटवारे का मुद्दा लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच चर्चा का विषय रहा है। 30 जुलाई 2026 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में नई दिल्ली में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक भी हुई थी, जिसका उद्देश्य संवाद के जरिए विवाद का समाधान तलाशना था।

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