तनाव समझकर BP को न करें नजरअंदाज, महिलाओं में हार्ट हेल्थ से जुड़े ये बदलाव हो सकते हैं गंभीर

हाई ब्लड प्रेशर और धमनियों में होने वाले बदलाव लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के बने रह सकते हैं। यही वजह है कि इन्हें समय रहते पहचानना जरूरी माना जाता है। खासकर महिलाओं में 30 और 40 की उम्र के दौरान हार्ट हेल्थ पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इस दौर में वजन बढ़ना, तनाव, नींद में बदलाव, शारीरिक गतिविधि में कमी और हार्मोनल बदलाव जैसे कई कारक एक साथ सामने आ सकते हैं।
कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. जगदीप यादव, निदेशक-कार्डियोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल मानेसर, के अनुसार उम्र बढ़ने के साथ धमनियां धीरे-धीरे अपनी लचक खो सकती हैं। इस स्थिति को आर्टरी स्टिफनेस यानी धमनियों का कठोर होना कहा जाता है।
धमनियों की लचक कम होने से क्या होता है?
धमनियां जितनी कम लचीली होती हैं, उन्हें हृदय द्वारा पंप किए गए रक्त के दबाव को संभालना उतना ही मुश्किल हो सकता है। इसका प्रभाव पल्स प्रेशर पर भी पड़ सकता है। पल्स प्रेशर सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर के बीच का अंतर होता है।
इसलिए केवल एक बार का ब्लड प्रेशर देखकर स्थिति का आकलन करना पर्याप्त नहीं माना जाता। समय के साथ ब्लड प्रेशर में होने वाले बदलाव और उसके पैटर्न पर भी ध्यान देना जरूरी है।
महिलाओं में हार्मोनल बदलाव भी डाल सकते हैं असर
मिडलाइफ के दौरान महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव भी हार्ट और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। खासकर पेरिमेनोपॉज और मेनोपॉज के आसपास वजन बढ़ना, नींद में बदलाव, तनाव, शारीरिक गतिविधि में कमी और मेटाबॉलिक बदलाव जैसे कई कारक सामने आ सकते हैं।
हालांकि, हर महिला में हार्ट संबंधी जोखिम एक जैसी उम्र या एक ही तरीके से बढ़े, ऐसा जरूरी नहीं है। इसलिए व्यक्तिगत जोखिम कारकों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य जांच कराना महत्वपूर्ण है।
30s और 40s में इन चीजों पर रखें नजर
डॉक्टर की सलाह के मुताबिक महिलाओं को 30 और 40 की उम्र से ही नियमित स्वास्थ्य जांच को प्राथमिकता देनी चाहिए। इस दौरान केवल ब्लड प्रेशर ही नहीं, बल्कि कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, वजन, कमर का घेरा और शारीरिक गतिविधि पर भी नजर रखना जरूरी है।
अगर परिवार में किसी सदस्य को हार्ट संबंधी बीमारी रही है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी देकर आवश्यक जांच के बारे में सलाह लेनी चाहिए।
BP में बदलाव को सिर्फ तनाव समझकर न टालें
अगर ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ रहा है या उसके सामान्य पैटर्न में बदलाव दिखाई दे रहा है, तो इसे केवल उम्र या तनाव का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच कराने से संभावित जोखिमों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक हार्ट हेल्थ की देखभाल किसी लक्षण के सामने आने के बाद शुरू करने के बजाय पहले से ही की जानी चाहिए। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव को नियंत्रित रखना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच हार्ट संबंधी जोखिमों को कम करने वाली महत्वपूर्ण जीवनशैली आदतें हैं।
जरूरी बात: ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल या हार्ट से जुड़े किसी भी जोखिम को लेकर व्यक्तिगत सलाह के लिए डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर है। केवल उम्र के आधार पर किसी व्यक्ति का जोखिम तय नहीं किया जा सकता।







