CBI केस में सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश, रविशंकर महाराज अब हाईकोर्ट में कर सकेंगे जल्द सुनवाई की मांग

 बिलासपुर : रविशंकर महाराज को सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई जांच से जुड़े मामले में थोड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका (SLP) का निपटारा करते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबित मामले की जल्द सुनवाई कराने के लिए आवेदन प्रस्तुत करने की छूट दी है। मामले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जायमाल्य बागची की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की।

यह मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबित याचिका से जुड़ा है] जिसमें दूरसंचार संदेशों के वैध अवरोधन से संबंधित आदेश की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया था कि टेलीकम्युनिकेशंस (प्रोसीजर्स एंड सेफगार्ड्स फार लाफुल इंटरसेप्शन आफ मैसेजेज) रूल्स, 2024 के नियम 3(3)(बी) के अनुसार इंटरसेप्शन आदेश को सात कार्य दिवस के भीतर समीक्षा समिति के समक्ष पुष्टि के लिए रखा जाना आवश्यक है। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो आदेश स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है और उसके आधार पर एकत्र साक्ष्य विचारणीय नहीं रहते।

मामले में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि यह विशिष्ट कानूनी आधार मूल याचिका में स्पष्ट रूप से उल्लेखित नहीं था। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को नया शपथपत्र दाखिल कर अपने तर्क स्पष्ट करने के निर्देश देने के साथ ही सीबीआई को सक्षम अधिकारी के शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने को कहा था। मामला पहले 24 जून को सूचीबद्ध किया गया था। अब इससे जुड़े कानूनी प्रश्नों पर आगे की सुनवाई 14 जुलाई 2026 को है। इसी बीच याचिकाकर्ता ने मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना केवल यह छूट दी है कि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट में अग्रिम सुनवाई का अनुरोध कर सकता है।

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