शिवलिंग पर चढ़ाते समय न करें ये भूल, सोमवार की पूजा हो सकती है निष्फल

सोमवार का दिन देवों के देव महादेव को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा और व्रत से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के सभी संकट हर लेते हैं। शिव पुराण के अनुसार, सोमवार की पूजा के कुछ कड़े नियम होते हैं। यदि इन नियमों की अनदेखी की जाए तो महादेव रुष्ट हो सकते हैं और पूजा का फल नहीं मिलता। तो आइए जानते हैं सोमवार की पूजा में कौन सी गलतियां करने से बचना चाहिए और पूजा की सही विधि क्या है।

सोमवार की पूजा की सही विधि

जलाभिषेक: सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सफेद, हरा या केसरिया रंग के वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में या पास के शिव मंदिर जाकर तांबे के लोटे से शिवलिंग पर शुद्ध जल या गंगाजल चढ़ाएं।

पंचामृत: जल के बाद कच्चे दूध, दही, शहद और घी से बने पंचामृत से अभिषेक करें और फिर दोबारा साफ जल अर्पित करें।

ये चीजें अर्पित करें: शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद महादेव की सबसे प्रिय चीजें,  बेलपत्र (बिना कटा-फटा), धतूरा, भांग, शमी के पत्ते और सफेद फूल अर्पित करें।

मंत्र जाप: पूजा के दौरान मन ही मन ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप करते रहें।

आरती और भोग: अंत में शिव चालीसा का पाठ करें, कपूर से आरती करें और भोलेनाथ को मिश्री या सफेद मिठाई का भोग लगाएं।

सोमवार पूजा के दौरान न करें ये गलतियां

हल्दी न चढ़ाएं- शिवलिंग पर कभी भी हल्दी नहीं चढ़ानी चाहिए। शिव पूजा में सफेद चंदन का ही प्रयोग करें।

तुलसी दल- शिव जी को तुलसी चढ़ाना सख्त मना है। पौराणिक कथा के अनुसार, महादेव ने तुलसी के पति जालंधर का वध किया था, जिसके बाद से शिव पूजा में तुलसी वर्जित है।

नारियल पानी- नारियल पानी से शिवलिंग का जलाभिषेक कभी न करें।

केतकी के फूल और सिंदूर- महादेव को केतकी का फूल कभी अर्पित न करें,। इसके अलावा शिवलिंग पर सिंदूर या कुमकुम भी नहीं चढ़ाया जाता है।

शंख से जल न दें- शिवलिंग का अभिषेक कभी भी शंख से नहीं करना चाहिए, हमेशा तांबे या पीतल के लोटे का उपयोग करें।

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