सावन 2026: कांवड़ यात्रा पर जाने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, नहीं तो अधूरा रह सकता है पुण्य

सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए बहुत ही उत्तम माना जाता है। हर शिव भक्त को सावन का बड़ी बेसब्री के साथ इंतजार रहता है। पावन माह सावन में जहां महादेव की पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और व्रत किया जाता है। वहीं दूसरी ओर सावन में कांवड़ यात्रा भी निकाली जाती है। हर साल सावन माह में भारी संख्या में भोले के भक्त कांवड़ लेकर प्रसिद्ध शिव मंदिरों में पहुंचकर महादेव का जलाभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि कांवड़ ले जाने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूर्ण होती हैं। साथ ही हर दुख-पीड़ा और रोग से मुक्ति मिलती है। लेकिन कांवड़ यात्रा को लेकर कई जरूरी बातें बताई गई हैं जिसका पालन करना अत्यंत जरूरी है। तो अगर आप पहली बार कांवड़ उठा रहे हैं तो इन नियमों का अवश्य ध्यान रखें।
कांवड़ से जुड़ी जरूरी नियम
- अगर कांवड़ यात्रा पर जा रहे हैं तो सावन से पहले और पूरे सावन माह मांस, मदिरा और तामसिक से दूर रहें।
- कांवड़ यात्रा के दौरान साफ-सफाई का खास ध्यान रखें।
- कांवड़ यात्रा के दौरान गंगा जल से भरी हुई कांवड़ को जमीन पर रखने की भूल बिल्कुल भी न करें। अगर जरूरी है तो कांवड़ को किसी ऊंचे स्थान पर ही रखें।
- कांवड़ को बिना स्नान किए नहीं छूना चाहिए।
- कांवड़ यात्रा के दौरान अपने कांवड़ को वृक्ष के नीचे कभी नहीं रखें।
- कांवड़ को अपने सिर के ऊपर से लेकर जाना भी वर्जित माना गया है।
- कांवड़ यात्रा के दौरान किसी के लिए भी बुरे शब्दों का इस्तेमाल न करें।
- कांवड़ ले जाते हुए दिल से बोल बम का नारा लगाएं।
कांवड़ यात्रा 2026 कब से शुरू हो रहा है?
इस साल कांवड़ यात्रा 30 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है, जिसका समापन 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के दिन होगा। झारखंड के बैद्यनाथ धाम समेत अन्य प्रसिद्ध शिव मंदिर में पूरे सावन कांवड़ियों की भारी भीड़ रहती है। बैद्यनाथ धाम के अलावा हरिद्वार और वाराणसी में भी कांवड़िए कांवड़ लेकर शिव के दरबार पहुंचकर भोलेनाथ को गंगा जल अर्पित करते हैं। आपको बता दें कि कांवड़ यात्रा तीन प्रकार के होते हैं- सामान्य, डाक और दांडी ।सामान्य कांवड़ यात्रा में कांवड़िए रुक-रुक कर आराम करते हुए यात्रा को पूरा करते हैं। डाक कांवड़ यात्रा में कांवड़िए निरंतर चलते रहते हैं और शिवजी का जलाभिषेक करने के बाद ही रुकते हैं। दांडी कांवड़ यात्रा में कांवड़िया गंगा के दंड करते हुए शिव मंदिर पहुंचते हैं।







