ब्रेन अटैक से लेकर ब्रेन ट्यूमर तक… दिमाग की इन 5 बीमारियों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

आजकल की लाइफस्टाइल तेज-रफ्तार से भाग रही है। जिसमें बढ़ता मानसिक तनाव, अनियमित दिनचर्या, प्रदूषण और बढ़ती उम्र शरीर में कई बीमारियों का कारण बन रही है। खासतौर से इस लाइफस्टाइल के लोगों को दिमाग से जुड़ी बीमारियां ज्यादा हो रही हैं। पिछले कुछ सालों में दिमाग से जुड़ी बीमारियों के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। डॉक्टर आदित्य गुप्ता (डायरेक्टर, न्यूरोसर्जरी एवं साइबरनाइफ, आर्टेमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम) ने बताया कि पहले जिन न्यूरोलॉजिकल समस्याओं को केवल बुजुर्गों तक सीमित माना जाता था, अब वो युवाओं और मध्यम आयु वर्ग में भी तेजी से सामने आ रही हैं। अच्छी बात यह है कि समय रहते पहचान और सही इलाज से इनमें से कई बीमारियों के गंभीर प्रभावों को रोका जा सकता है।

दिमाग से जुड़ी तेजी से बढ़ने वाली 5 बीमारियां 

स्ट्रोक- आज सबसे तेजी से बढ़ने वाली न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में से एक स्ट्रोक यानि ब्रेन अटैक है। यह तब होता है जब मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह रुक जाता है या किसी रक्त वाहिका के फटने से ब्लीडिंग होने लगती है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, मोटापा और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल इसके खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं।

स्ट्रोक के लक्षण- अचानक चेहरे का टेढ़ा होना, एक हाथ या पैर में कमजोरी, बोलने में कठिनाई, संतुलन बिगड़ना या अचानक दृष्टि धुंधली होना।

ब्रेन ट्यूमर- मस्तिष्क की बीमारियों में ब्रेन ट्यूमर के मामले भी काफी बढ़ने लगे हैं। यह ट्यूमर सौम्य (Benign) या घातक (Malignant) दोनों प्रकार का हो सकता है। इसमें आज आधुनिक न्यूरोसर्जरी, माइक्रोस्कोपिक तकनीकों और साइबरनाइफ जैसी उन्नत तकनीकों से अच्छा सफल इलाज संभव है।

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण- लगातार सिरदर्द, बार-बार उल्टी, दौरे पड़ना, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या व्यवहार में बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

पार्किंसन रोग-  एक समय था जब इसे बुढ़ापे की बीमारी माना जाता था, लेकिन पार्किंसन एक प्रगतिशील न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें मस्तिष्क की वे कोशिकाएं प्रभावित होती हैं जो शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करती हैं। पहले यह बीमारी मुख्य रूप से बुजुर्गों में देखी जाती थी, लेकिन अब अपेक्षाकृत कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं।

लक्षण- हाथों में कंपन, चलने में कठिनाई, शरीर का अकड़ना और गतिविधियों का धीमा हो जाना।

अल्जाइमर और डिमेंशिया- भारत में बढ़ती बुजुर्ग आबादी के साथ अल्जाइमर और अन्य तरह के डिमेंशिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसमें धीरे-धीरे याददाश्त कमजोर होने लगती है, निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है और व्यक्ति की दैनिक गतिविधियां भी प्रभावित होने लगती हैं।

डिमेंशिया के लक्षण- यदि किसी व्यक्ति में बार-बार भूलने की समस्या, परिचित लोगों को पहचानने में कठिनाई या व्यवहार में बदलाव दिखाई दे, तो डॉक्टर को दिखाएं।

मिर्गी (एपिलेप्सी)- मिर्गी एक सामान्य लेकिन अक्सर गलत समझी जाने वाली न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें मस्तिष्क की असामान्य विद्युत गतिविधि के कारण बार-बार दौरे पड़ते हैं। सही दवा और नियमित उपचार से अधिकांश मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। कुछ जटिल मामलों में सर्जरी भी प्रभावी विकल्प हो सकती है।

दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए किन बातों का रखें ध्यान?

  • रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें।
  • धूम्रपान और तंबाकू से दूर रहें।
  • नियमित व्यायाम करें और संतुलित आहार लें।
  • पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद लें।
  • अत्यधिक तनाव से बचें और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
  • अचानक बोलने, चलने, देखने या याददाश्त में बदलाव जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें।

दिमाग हमारे शरीर का कंट्रोल सेंटर है। इसके स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना गंभीर परिणामों का कारण बन सकता है। समय पर जांच, शुरुआती पहचान और आधुनिक उपचार से अधिकांश न्यूरोलॉजिकल बीमारियों को कंट्रोल किया जा सकता है। इसलिए किसी भी असामान्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण को सामान्य मानकर टालने की बजाय विशेषज्ञ से सलाह लें।

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