गरियाबंद में अवैध प्लाटिंग का मकड़जाल, प्रशासन मौन राजस्व विभाग की मिलीभगत का आरोप

गरियाबंद :  जिले में अवैध प्लाटिंग का कारोबार तेजी से पैर पसारता जा रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक बिना अनुमति, बिना ले-आउट स्वीकृति और बिना बुनियादी सुविधाओं के धड़ल्ले से जमीन की अवैध खरीदी-बिक्री की जा रही है। हालात यह है कि कॉलोनाइजर एक्ट का खुलेआम कृषि भूमि को टुकड़ों में काटकर प्लाट बेचकर धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। गरियाबंद में इस पूरे खेल में राजस्व विभाग की मिलीभगत साफ तौर पर नजर आ रही है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि नियमों को ताक पर रखकर नामांतरण, बंटवारा और अन्य राजस्व प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं, जिससे भू–माफियाओं के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।

–सीएम से शिकायत के बाद भी कार्रवाई शून्य–
मामले की गंभीरता को देखते हुए अवैध प्लाटिंग को लेकर गरियाबंद नगर के एक वरिष्ठ पत्रकार ने मुख्यमंत्री से शिकायत की तब जाकर पालिका प्रशासन ने कार्यवाही की, लेकिन राजस्व विभाग कार्यवाही के बजाय इसे ठेंगा दिखा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार का सवाल है कि क्या इस तरह के स्थानीय मामलों की शिकायत अब मुख्यमंत्री तक करने पर ही कार्यवाही की जायेगी, स्थानीय स्तर पर की गई शिकायतों का कोई महत्व नहीं होगा ? हालांकि इसी सप्ताह वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा कलेक्टर गरियाबंद से भी उपरोक्त भूखंडों के अंतरण शीघ्र शून्य करने की मांग की गई है।

शिकायत में स्पष्ट रूप से बताया गया कि किस तरह नियमों की अनदेखी कर प्लाटिंग कराई जा रही है, लेकिन इसके बावजूद न तो भू–माफियाओं पर कार्रवाई हुई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई शिकंजा कसा गया। इससे आम जनता में यह संदेश जा रहा है कि शिकायतों को महज औपचारिकता समझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।

–भविष्य में बन सकता है बड़ा संकट–
जानकारों की मानें तो यदि समय रहते अवैध प्लाटिंग पर रोक नहीं लगी, तो भविष्य में यह गंभीर समस्या का रूप ले सकती है। बिना सड़क, नाली, बिजली, पानी और सीवरेज व्यवस्था के बसाई जा रही कॉलोनियों से न केवल शहरी अव्यवस्था बढ़ेगी, बल्कि शासन को भी बाद में भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा।

–भोले-भाले लोग हो रहे ठगी का शिकार–
अवैध प्लाटिंग का सबसे बड़ा शिकार आम और मध्यम वर्गीय लोग हो रहे हैं। सस्ते प्लाट का सपना दिखाकर उनसे लाखों रुपये वसूले जा रहे हैं, लेकिन बाद में न रजिस्ट्री होती है और न ही वैध दस्तावेज। कई मामलों में जमीन विवाद, कब्जा और कोर्ट-कचहरी की नौबत आ रही है।

–प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल–
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नियम स्पष्ट हैं और अवैध प्लाटिंग कानूनन अपराध है, तो फिर प्रशासन कार्रवाई से क्यों कतरा रहा है? क्या विभागीय संरक्षण के बिना इतना बड़ा नेटवर्क संभव है? यही सवाल अब आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक आंखें मूंदे रहता है या फिर अवैध प्लाटिंग के इस मकड़जाल को तोड़ने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं।

शिकायत के मुताबिक नगर पालिका परिषद गरियाबंद के वार्ड क्रमांक 15 जो कि गरियाबंद का सबसे बड़ा भू–माफिया है, जिसके पीछे पूरा प्रशासन घूमता है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि नगर पालिका प्रशासन राजस्व विभाग से सहयोग नहीं मिलने पर प्रकरण को सीधे रेरा रायपुर को त्वरित कार्यवाही के लिए प्रेषित कर दी गई है।

वर्जन 
मुख्य नगर पालिका अधिकारी संध्या वर्मा ने बताया कि अवैध प्लाटिंग मामले में कार्यवाही की जा रही है। नगरीय निकाय क्षेत्र में जो प्रकरण सामने आए थे, उसका प्रकरण तैयार कर टीएनसी को प्रेषित किए गए हैं। टीएनसी से जैसे ही प्रतिवेदन मिलता है, तत्काल भू–माफियाओं पर कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रतिवेदन मिलते ही संबंधितों पर एफआईआर दर्ज करवाया जाएगा।

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