ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों का सफल बीज उत्पादन : उप संचालक कृषि ने किया मैदानी निरीक्षण

बेमेतरा : जिले में जल संरक्षण एवं कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में कृषकों द्वारा ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों को अपनाने का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है। इसी क्रम में बेमेतरा जिले के ग्राम जेवरा, जिया, पत्थर्रा एवं रवेली में इस वर्ष कृषकों द्वारा चना, गेहूँ, सरसों एवं रागी जैसी वैकल्पिक फसलों का बीज उत्पादन कार्यक्रम अंतर्गत उत्पादन किया जा रहा है। उक्त सभी फसलों का संबंधित बीज निगम में विधिवत पंजीयन कराया गया है। बीज उत्पादन कार्यक्रम की प्रगति एवं गुणवत्ता का आकलन करने हेतु दिनांक 10 जनवरी 2026 को उप संचालक कृषि, जिला बेमेतरा श्री मोरध्वज डडसेना द्वारा मैदानी निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान संबंधित कृषि अधिकारी एवं बड़ी संख्या में कृषक उपस्थित रहे।

निरीक्षण के दौरान उप संचालक कृषि द्वारा खेतों में ली गई फसलों की स्थिति का विस्तार से अवलोकन किया गया। कृषकों द्वारा बीज उत्पादन हेतु ली गई फसलें सामान्यतः अच्छी, स्वस्थ एवं संतोषजनक अवस्था में पाई गईं। फसलों में किस्म की शुद्धता, पौधों की समान वृद्धि एवं विकास का सूक्ष्म निरीक्षण किया गया, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया गया। मैदानी निरीक्षण में यह भी पाया गया कि कृषकों द्वारा बीज निगम के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए कृषि कार्य किया जा रहा है। खेतों में फसल स्वास्थ्य, खरपतवार नियंत्रण, रोग एवं कीट प्रबंधन की स्थिति संतोषजनक रही। उप संचालक कृषि द्वारा कृषकों को बीज उत्पादन की गुणवत्ता बनाए रखने, शुद्धता संरक्षण, समय पर रोग-कीट नियंत्रण तथा वैज्ञानिक पद्धतियों के उपयोग संबंधी आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया।
निरीक्षण के उपरांत यह स्पष्ट हुआ कि बीज उत्पादन कार्यक्रम अंतर्गत ली गई वैकल्पिक फसलें अच्छी अवस्था में हैं तथा कृषक इस कार्यक्रम में रुचि लेकर निर्धारित मानकों का गंभीरता से पालन कर रहे हैं। इससे न केवल कृषकों की आय में वृद्धि की संभावना है, बल्कि जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार एवं टिकाऊ कृषि को भी बल मिलेगा।

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