पाकिस्तानी हैंडलरों ने इंस्टाग्राम के जरिए भारतीय किशोरों को बनाया निशाना, ATS ने UAPA के तहत दर्ज किया केस

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आतंकवाद विरोधी दस्ता (एटीएस) ने एक गंभीर आतंकी षड्यंत्र का खुलासा किया है। प्रदेश में पहली बार ऐसा मामला सामने आया है जिसमें इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) का पाकिस्तान-आधारित मॉड्यूल इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर भारतीय किशोरों को कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित कर रहा था।

एटीएस ने शुक्रवार देर रात विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम-1967 के तहत अपराध क्रमांक 01/25 पंजीबद्ध किया, जिसके बाद जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।

इंस्टाग्राम के फर्जी अकाउंट के जरिए फैलाया जा रहा था जिहादी जहर

जांच में सामने आया कि पाकिस्तानी हैंडलर फर्जी व छद्म नाम वाले इंस्टाग्राम अकाउंट संचालित कर रहे थे, जिन्हें देखने में सामान्य प्रेरणादायी या धार्मिक पेज जैसा दिखाया जाता था। इन आईडी के जरिए वे धीरे-धीरे भारतीय युवाओं और किशोरों से संपर्क बढ़ाते थे, फिर उन्हें गुप्त चैट ग्रुप में जोड़ते थे।

इन ग्रुप्स में किशोरों को उग्र और भड़काऊ कंटेंट, जिहादी साहित्य व वीडियो, ISIS से जुड़े भाषण व प्रचार सामग्री और भारत-विरोधी संदेश नियमित रूप से भेजे जा रहे थे।

एटीएस के अधिकारियों के अनुसार यह कट्टरपंथीकरण बिलकुल संगठित और योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा था, जिसमें किशोरों की मानसिकता को कमजोर कर उन्हें “जिहादी मार्ग” अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।

छत्तीसगढ़ में ISIS मॉड्यूल तैयार करने का प्रयास

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि पकड़े गए डिजिटल साक्ष्यों में स्पष्ट संकेत मिले हैं कि पाकिस्तानी हैंडलरों ने नाबालिग भारतीय किशोरों को छत्तीसगढ़ में ISIS का लोकल मॉड्यूल तैयार करने के लिए उकसाया था। उन्हें यह विश्वास दिलाया जा रहा था कि राज्य में “जिहाद की नई शाखा” खड़ी की जा सकती है, और इसके जरिये भविष्य में बड़ी हिंसक गतिविधियाँ की जाएँ।

एटीएस की सतर्कता से दो नाबालिगों की पहचान
एटीएस की निरंतर साइबर मॉनिटरिंग, ट्रैकिंग, आईपी विश्लेषण और चैट डेटा स्कैनिंग के आधार पर दो ऐसे किशोर चिन्हित किए गए जो विदेशी हैंडलरों के संपर्क में आ चुके थे।
जांच में शामिल टीम ने उनके मोबाइल फोन, इंस्टाग्राम चैट बैकअप, ब्राउजिंग इतिहास, विदेशी अकाउंट से संपर्क और वर्चुअल प्रॉक्सी उपयोग जैसे कई तकनीकी पहलुओं का विश्लेषण कर यह नेटवर्क पकड़ा।

दोनों नाबालिगों ने स्वीकार किया है कि उन्हें ISIS से जुड़े संदेश, वीडियो और उकसावे वाली पोस्ट लगातार मिल रही थीं। एटीएस ने उनके विरुद्ध कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है और काउंसलिंग भी करवाई जा रही है।

आतंकी साजिश पर बड़ा प्रहार

एटीएस अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते इस साजिश का पता नहीं चलता, तो राज्य में किशोरों का शोषण कर एक आतंकी नेटवर्क खड़ा किया जा सकता था। एजेंसियों की सक्रियता के कारण एक गंभीर आतंकी खतरा टल गया।

नागरिकों से अपील

एटीएस ने कहा है कि सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी अभियान तेजी से बढ़ रहे हैं और किशोर इनका सबसे आसान निशाना बनते हैं। किसी भी संदिग्ध चैट, अकाउंट या कंटेंट की जानकारी तुरंत साइबर सेल या पुलिस को देने की अपील की गई है।

सूत्रों के अनुसार मामले में और भी डिजिटल कड़ियाँ सामने आ रही हैं और आने वाले दिनों में कई और खुलासे संभव हैं। जांच टीम विदेशी हैंडलरों की पहचान, उनकी लोकेशन और नेटवर्क का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पता लगाने में जुटी है।

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