चिंतामण गणेश मंदिर में कब की जाती है चोला आरती और क्या है इसका धार्मिक महत्व?

प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन भगवान गणेश की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। विशेष कामों में सफलता पाने के लिए चतुर्थी के दिन व्रत रखा जाता है। वहीं, संध्या काल में चंद्र देव का दर्शन किया जाता है।
सनातन शास्त्रों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। भगवान गणेश की पूजा करने से सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है। साथ ही गणपति बप्पा की कृपा से करियर और कारोबार में मनमुताबिक सफलता मिलती है। इस शुभ अवसर पर साधक निकटतम मंदिर में गणपति बप्पा के दर्शन कर उनकी कृपा के भागी बनते हैं।
देशभर में कई प्रमुख गणपति मंदिर हैं। इनमें एक मंदिर मध्य प्रदेश में हैं, जो चिंतामण, इच्छामन और सिद्धिविनायक से प्रसिद्ध हैं। चिंतामण मंदिर में रोजाना चोला आरती का आयोजन किया जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि चिंतामण मंदिर में चोला आरती कब की जाती है? आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं।
धार्मिक मत है कि चिंतामण मंदिर में भगवान गणेश के दर्शन करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। गणपति बप्पा के दरबार में तीन समय आरती की जाती है। इनमें चोला आरती सबसे पहले होती है। वहीं, सबसे अंत में शयन आरती की जाती है। गणपति जी की आरती में बड़ी संख्या में भक्तजन शामिल होते हैं।







