कामदा एकादशी के बाद अप्रैल में कब है वरुथिनी एकादशी? पहले ही कर लें तैयारी

हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी 29 मार्च को मनाई जाएगी। यह एकादशी ‘इच्छाओं को पूरा करने वाली’ मानी जाती है। ये न केवल साधक की मनोकामनाएं सिद्ध करती है बल्कि जाने-अनजाने में हुए पापों के प्रायश्चित का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने के लिए यह दिन मार्च के महीने का सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पड़ाव है। लेकिन, पुण्य कमाने का यह सिलसिला मार्च के साथ ही नहीं थमता। नए महीने यानी अप्रैल 2026 (April 2026) की पहली एकादशी ‘वरुथिनी एकादशी’ के रूप में दस्तक देने वाली है। शास्त्रों में वरुथिनी एकादशी को सौभाग्य और अक्षय पुण्य प्रदान करने वाला बताया गया है।

अप्रैल में कब कौन-सी एकादशी है?वैदिक पंचांग के अनुसार, 13 अप्रैल को वरूथिनी एकादशी और 27 अप्रैल को मोहिनी एकादशी व्रत किया जाएगा।

वरूथिनी एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्तवरुथिनी एकादशी 2026: मुख्य तिथियां

माह और पक्ष: वैशाख माह, कृष्ण पक्ष।

एकादशी तिथि प्रारंभ: 13 अप्रैल, देर रात 01:16 बजे से।

एकादशी तिथि समाप्त: 14 अप्रैल, देर रात 01:08 बजे तक।

व्रत की तारीख: उदयातिथि के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा।

इन बातों का रखें खास ध्यान

  • एकादशी व्रत के दिन सात्विक भोजन का सेवन करें।
  • किसी से वाद-विवाद न करें।
  • काले रंग के कपड़े धारण न करें।
  • घर और मंदिर में साफ-सफाई का ध्यान रखें।
  • व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर करें।
  • अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करें।
  • तुलसी की पूजा-अर्चना करें।
  • व्रत कथा का पाठ करें।
  • भोग में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें।

एकादशी पर क्या दान करना चाहिए?मिट्टी के घड़े या मटके में पानी भरकर दान करना सबसे उत्तम माना जाता है। अगर संभव हो तो प्याऊ की व्यवस्था करें।

गेहूं, चावल या मौसमी फल जैसे खरबूजा और आम का दान करना बहुत शुभ होता है।

बढ़ती धूप को देखते हुए जरूरतमंदों को छतरी (छाता) या पैरों के लिए जूते-चप्पल देना बहुत बड़ा पुण्य का काम माना जाता है।

गर्मी में सत्तू और मिश्री का दान सेहत और शास्त्र, दोनों के हिसाब से अच्छा बताया गया है।

शाम के समय मंदिर में या फिर तुलसी के पौधे के पास दीपदान करने से जीवन के सभी अंधकार दूर होते हैं। साथ ही, मानसिक शांति भी मिलती है।

इस दिन धार्मिक पुस्तकों का दान भी बेहद फलदायी माना जाता है।

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