नवरात्र के छठे दिन पढ़ें यह चमत्कारी कथा, जल्द विवाह के बनेंगे योग

शारदीय नवरात्र में छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित है। देवी दुर्गा का यह स्वरूप बेहद शक्तिशाली, उग्र और मंगलकारी माना जाता है। मां कात्यायनी को ‘महिषासुरमर्दिनी’ भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने ही महिषासुर नामक दानव का वध किया था। ऐसी मान्यता है कि इस दिन मां कात्यायनी व्रत कथा का पाठ करना परम कल्याणकारी माना गया है, तो आइए पढ़ते हैं –
इसी कारण उन्हें महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है। कहते हैं कि ब्रज की गोपियों ने भी भगवान श्री कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए कालिंदी-यमुना के किनारे मां कात्यायनी की ही आराधना की थी। ऐसा कहा जाता है कि देवी की उपासना करने से जल्द विवाह के योग बनते हैं और वैवाहिक जीवन सुखी रहता है।
नन्दगोपसुतं देवि, पतिं मे कुरु ते नमः।।
गोधूलि बेला में करें पूजा मां कात्यायनी की पूजा गोधूलि बेला में करना बहुत शुभ माना जाता है। इस समय देवी को पीले या नारंगी रंग के कपड़े, फल, फूल और मिठाई आदि अर्पित करें। साथ ही की मां कात्यायनी की कथा पढ़कर और विधि-विधान से पूजा पूर्ण कर आरती करें।







