प्रधानमंत्री आवास योजना ने बदली मंगलू की ज़िंदगी, सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनी योजना

सुकमा : ज़िले के छोटे से गाँव छिंदगढ़ में रहने वाले 45 वर्षीय मंगलू की ज़िंदगी प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत मिली सहायता से पूरी तरह बदल गई है। पहले कच्चे और जर्जर घर में अपने दो बच्चों के साथ कठिनाइयों का सामना कर रहे मंगलू आज एक पक्के, सुरक्षित और सम्मानजनक घर में निवास करते हैं।

बरसात के दिनों में टपकती छत, गर्मी में तपती दीवारें और सर्दी में खुले मैदान जैसी स्थिति ये सब अब उनकी ज़िंदगी का हिस्सा नहीं। योजना के अंतर्गत मिले ₹1.20 लाख और मनरेगा के तहत मजदूरी से उनके सपनों का घर आकार ले सका। गाँव वालों की मदद और प्रशासन के मार्गदर्शन से कुछ ही महीनों में उनके लिए दो कमरे, साफ़ रसोई, बिजली और शौचालय वाला आधुनिक घर तैयार हो गया। जब परिवार ने पहली बार नए घर में प्रवेश किया तो उनकी आँखों में खुशी और राहत के आँसू थे। मंगलू ने कहा अब मैं दूसरों के घर जाकर शरण नहीं मांगता। मेरा भी घर है। मेरे बच्चों को अब चैन से नींद आती है।

प्रधानमंत्री आवास योजना ने केवल ईंट-पत्थरों का घर नहीं दिया, बल्कि मंगलू जैसे हजारों परिवारों को आत्मसम्मान और सुरक्षा प्रदान की है। प्रशासन का यह प्रयास समाज के सबसे वंचित वर्ग तक विकास की रोशनी पहुँचाने का प्रमाण है।

जिला सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर ने बताया कि जिले में पात्र परिवारों तक पीएम आवास योजना पहुँचाई जा रही है और प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि हर जरूरतमंद को उसका अधिकार मिले। ग्रामीणों को आवास उपलब्ध कराया जा रहा है उनके लिए गाँव में ही रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही सामाजिक सहभागिता और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दिया गया है।

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