आपदा प्रबंधन की बैठक संपन्न, सतर्कता और तैयारी के निर्देश

बेमेतरा : कलेक्टर रणबीर शर्मा की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट स्थित दिशा सभाकक्ष में आपदा प्रबंधन की बैठक हुई । बैठक में बाढ़ संभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों की तैयारी की विस्तृत समीक्षा की गई।कलेक्टर शर्मा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पूर्व अनुभवों के आधार पर बाढ़ संभावित इलाकों में सभी आवश्यक तैयारियाँ सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने विशेष रूप से सभी अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीएम) को निर्देश दिए कि वे बिना अनुमति के मुख्यालय न छोड़ें और उनके शासकीय वाहनों में रस्सी, टॉर्च, आवश्यक दवाइयाँ और फर्स्ट एड किट अनिवार्य रूप से उपलब्ध होनी चाहिए ताकि आपातकालीन स्थिति में तत्काल उपयोग हो सके।उन्होंने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ या जल भराव की सूचना मिलते ही त्वरित राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ करें। अस्थायी राहत शिविरों की तैयारी, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन, होमगार्ड और नगर सेना की रेस्क्यू टीम को अलर्ट मोड में रखा जाए। उन्होंने कहा कि स्कूल, आंगनबाड़ी और पंचायत भवनों में अस्थायी शिविर स्थापित कर प्रभावितों को सुरक्षित आश्रय दिया जाए।

बैठक में पुलिस अधीक्षक रामकृष्ण साहू, अपर कलेक्टर अनिल बाजपेयी, जिले के सभी एसडीएम, डीएसपी श्री राजेश कुमार झा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग, वन विभाग, सभी एसडीएम, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी उपस्थित रहे।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री साहू ने कहा कि समय पर पूर्व तैयारी हो तो जन-धन की हानि को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि सूचना तंत्र सुदृढ़ हो, ताकि फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस और गोताखोर समय पर घटना स्थल पर पहुँच सकें।कलेक्टर रणबीर शर्मा ने जिला और तहसील स्तर पर नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) स्थापित करने तथा बाढ़ नियंत्रण अधिकारी नामांकित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में हर वर्ष बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है, वहाँ विशेष सतर्कता बरती जाए और पहले से राहत शिविर की योजना बनाकर खाद्यान्न, केरोसिन और जीवन रक्षक दवाओं का भंडारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कर पेयजल की शुद्धता सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि बचाव उपकरणों की जांच कर उन्हें कार्यशील स्थिति में रखा जाए। मोटरबोट की उपलब्धता की जानकारी राहत आयुक्त को भेजी जाए। सभी वर्षा मापक केंद्रों पर यंत्रों का समुचित संधारण किया जाए।शर्मा ने कहा कि नदियों के जल स्तर की लगातार निगरानी होनी चाहिए और जल स्तर खतरे के निशान के पास पहुँचने पर तुरंत राज्य स्तर के कंट्रोल रूम और संबंधित निचले जिलों को सूचित किया जाए। साथ ही, आस-पास के जिलों से जलाशयों के जल छोड़ने की स्थिति में विशेष सतर्कता बरती जाए और संभावित प्रभावित गांवों को कम से कम 12 घंटे पहले सूचित किया जाए।उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कहीं भी बाढ़ से क्षति होती है तो उसकी जानकारी समय पर जिला प्रशासन को दी जाए ताकि आवश्यक राहत कार्य प्रारंभ किए जा सकें।

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