नाबालिग से दुष्कर्म केस: DNA जांच में आरोपी को बच्चे का पिता बताया गया, हाईकोर्ट ने नहीं दी जमानत

बिलासपुर: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आरोपी युवक को जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने आरोपी छोटू यादव की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि मामले में पीड़िता के बयान, गर्भावस्था से संबंधित चिकित्सकीय साक्ष्य और नवजात की DNA जांच रिपोर्ट प्रथम दृष्टया आरोपों को समर्थन देते हैं।

हाईकोर्ट के समक्ष पेश DNA रिपोर्ट में आरोपी को पीड़िता से जन्मे बच्चे का जैविक पिता बताया गया है। अदालत ने इस रिपोर्ट को मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। आरोपी के खिलाफ कोरबा के अजाक थाने में पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 और 6 तथा अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(V) के तहत मामला दर्ज है।

आरोपी मूल रूप से बिहार के सहरसा जिले के बड़ियारी गांव का रहने वाला है और वर्तमान में कोरबा जिले के आवराकछार चुहिया में रह रहा था।

क्या है पूरा मामला?

अभियोजन के अनुसार, 4 मई 2025 को पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि परिवार के सदस्यों के जंगल जाने के दौरान उनकी दूसरी बेटी घर पर अकेली थी। जब परिवार वापस लौटा तो वह घर पर नहीं मिली।

इसके बाद 10 मई 2025 को पीड़िता खुद घर लौट आई। पीड़िता से मिली जानकारी के आधार पर परिजनों ने आरोपी के खिलाफ अजाक थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।

जांच के दौरान आरोपी के साथ पीड़िता के शारीरिक संबंध होने और उसके गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने 17 सितंबर 2025 को चालान पेश किया, जिसके बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए।

शादी का भरोसा देकर संबंध बनाने का आरोप

ट्रायल कोर्ट के समक्ष दिए बयान में पीड़िता ने आरोपी पर प्रेम जताने और शादी का भरोसा देकर उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया। उसके मुताबिक आरोपी उसे जंगल और अपने घर के आंगन में ले गया था, जहां उसके साथ करीब छह-सात बार संबंध बनाए गए।

पीड़िता ने बताया कि बाद में उसे अपनी गर्भावस्था के बारे में जानकारी हुई और उसने आरोपी को भी इसकी जानकारी दी। बरामदगी के समय वह करीब सात से आठ महीने की गर्भवती थी।

पीड़िता ने बाद में बच्चे को जन्म दिया, लेकिन जन्म के करीब एक सप्ताह बाद नवजात की मौत हो गई।

DNA रिपोर्ट को हाईकोर्ट ने माना महत्वपूर्ण

हाईकोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड पर गौर करते हुए कहा कि पीड़िता के बयान को गर्भावस्था से जुड़े चिकित्सकीय साक्ष्य से समर्थन मिलता है। अदालत के मुताबिक, मामले में DNA जांच रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण है, जिसमें आरोपी को मृत बच्चे का जैविक पिता बताया गया है।

कोर्ट ने माना कि यह रिपोर्ट आरोपी और पीड़िता के बीच शारीरिक संबंध होने के आरोप को प्रथम दृष्टया समर्थन देने वाला महत्वपूर्ण साक्ष्य है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया।

आरोपी ने बचाव में क्या कहा?

जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से बचाव में कहा गया कि पीड़िता अपनी इच्छा से उसके साथ पटना और चांपा गई थी और दोनों के बीच प्रेम संबंध था। बचाव पक्ष ने पीड़िता की उम्र को लेकर भी सवाल उठाए।

हालांकि, अदालत ने रिकॉर्ड के आधार पर पाया कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम थी। मामले में पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराध दर्ज होने और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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