करंट की अफवाह ने मचाई तबाही! अशोक धाम में भगदड़ से 8 महिलाओं की मौत, 9 घायल

लखीसराय : बिहार के लखीसराय स्थित ऐतिहासिक अशोक धाम (इन्द्र दमनेश्वर महादेव मंदिर) में सावन के तीसरे सोमवार को बड़ा हादसा हो गया। जलाभिषेक के लिए उमड़ी भारी भीड़ के बीच बिजली के पोल में करंट फैलने की अफवाह के बाद अचानक भगदड़ मच गई। हादसे में 8 महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 9 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को उपचार के लिए स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सुबह 6:45 बजे मची भगदड़
जानकारी के अनुसार, हादसा सोमवार सुबह करीब 6:45 बजे हुआ। उस समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए कतार में खड़े थे। इसी दौरान बिजली के पोल में करंट आने की अफवाह तेजी से फैली और श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे और इसी दौरान कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए।
ट्रेनें आने के बाद शुरू हुई अफरा-तफरी
जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और एडीएम नीरज कुमार के अनुसार, अशोक धाम हाल्ट पर एक ही समय में दोनों तरफ से ट्रेनें आ गई थीं। ट्रेन को देखकर कुछ युवकों ने अचानक भागना शुरू कर दिया। उनकी भाग-दौड़ के दौरान बिजली का एक पोल गिर गया।
पोल गिरने के बाद मौके पर करंट फैलने की अफवाह उड़ गई। प्रशासन के मुताबिक उस समय बिजली आपूर्ति बंद थी और तार भी कवर किया गया था। इसके बावजूद अफवाह के कारण श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई और देखते ही देखते भगदड़ की स्थिति बन गई।
मौके पर पहुंचा प्रशासन, राहत-बचाव शुरू
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
प्रशासन ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। हादसे के वास्तविक कारणों और सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित चूक की जांच की जा रही है।
आस्था का बड़ा केंद्र है अशोक धाम
लखीसराय जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित अशोक धाम मंदिर बिहार के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां विशाल शिवलिंग और भव्य मंदिर परिसर श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। बताया जाता है कि वर्ष 1977 में यहां पालकालीन विशाल शिवलिंग मिला था, जिसके बाद यह स्थल धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र बन गया। सावन के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और दर्शन के लिए पहुंचते हैं।







