कांवड़ यात्रा के बाद घर में भी लागू रहते हैं ये नियम! सात्त्विक भोजन से लेकर पूजा तक रखें खास ध्यान

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है और इन दिनों शिवभक्त अपनी आस्था को महादेव के आगे प्रकट करने के लिए कोई भी मौका नहीं छोड़ते हैं। इनमें से एक तरीका कांवड़ यात्रा में हिस्सा लेना होता है। सावन की प्रारंभ से लेकर सावन शिवरात्रि तक यह यात्रा चलती है। यात्रा के साथ-साथ कावडि़यों को सात्विक जीवन भी जीना होता है और भगवान शिव का व्रत रखना होता है। यह सब किसी के लिए सरल नहीं है, जब तक घरवालों का सहयोग न हो।
जब एक व्यक्ति कांवड़ यात्रा शुरू करता है तो यह उसके अकेले की यात्रा नहीं होती है, बल्कि उसका परिवार भी मानसिक रूप से इस यात्रा का हिस्सा होता है। वहीं यात्रा के दौरान और बाद तक कांवड़ियों की जो दिनचर्या होती है, उसे परिवार वालों को भी जीना होता है। सावन शिवरात्रि के बाद यात्रा समाप्त हो जाती है, मगर कांवडि़यों को कुछ दिन और सात्विक जीवन ही जीना होता है और इसके कुछ नियम होते हैं, जो कांवडि़यों के साथ-साथ उनके घरवालों के ऊपर भी लागू होते हैं। चलिए, इन जरूरी नियमों के बारे में हम आपको विस्तार से बताते हैं।
कांवड़िए कैसे खोलें अपना व्रत?
कांवड़ यात्रा के समाप्त होने के बाद भी यात्रा का हिस्सा रह चुके भक्त और उसके परिवार को सात्विक भोजन ही ग्रहण करना होता है। कम-से-कम पूरे सावन भर तो इस नियम का पालन जरूर करना चाहिए।
कांवड यात्रा के समाप्त होने के बाद भी यात्रा का हिस्सा रह चुके भक्त और उसके परिवार को सात्विक भोजन ही ग्रहण करना होता है। कम से कम पूरे सावन भर तो इस नियम का पालन जरूर करना चाहिए।
सात्विक भोजन
कांवड यात्रा के समाप्त होने के बाद भी यात्रा का हिस्सा रह चुके भक्त और उसके परिवार को सात्विक भोजन ही ग्रहण करना होता है। कम से कम पूरे सावन भर तो इस नियम का पालन जरूर करना चाहिए।
तामसिक जीवन का त्याग
इस दौरान तामसिक जीवन भोग विलासिता आदि का भी त्याग जरूरी है। यह समय खुद को पूरी तरह से शिव भक्ति में समर्पित कर देने का होता है। कांवड़ यात्रा में हिस्सा लेने वाले के साथ-साथ इस बात का ख्याल उसके घरवालों को भी जरूर रखना चाहिए।
ब्रह्मचर्य
ब्रह्मचर्य भी एक तरह का व्रत है और सावन के महीने भर एक कांवडि़ए को इस व्रत का पालन करना चाहिए। अपनी जीवनशैली को धार्मिक बनाने के लिए भक्त को अपनी इंद्रियों पर काबू पाना होता है। यह तब ही संभव है, जब घरवाले भी ब्रह्मचर्य का पालन करें।
नियमित पूजा
यह सबसे जरूरी है। शिव भक्त को कांवड़ यात्रा के समाप्त होने के बाद भी नियम से पूजा करनी चाहिए। इससे मन शांत रहता है और कोई नकारात्मक ख्याल मन में नहीं आता है। घर का माहौल भी ऐसा ही होना चाहिए।
सकारात्मक व्यवहार
यदि अपने जीवन को शांत और संयमित बनाना है, तो बहुत जरूरी है कि घर का वातावरण सकारात्मक हो। इसके लिए खुद कांवडि़ए के साथ-साथ उसके परिवार वालों को भी वाद-विवाद से बचने, क्रोध को त्यागने और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए।
अतः कांवड़ यात्रा भले समाप्त हो गई हो, मगर ऊपर बताए गए नियमों का पालन एक कांवड़िए और उसके परिवार के लिए सावनभर जरूरी होता है।







