गर्भवती महिलाएं भूलकर भी न देखें ग्रहण! जानें सूर्य-चंद्र ग्रहण के दौरान क्यों बताए गए हैं ये खास नियम

सूर्य और चंद्र ग्रहण की अवधि को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ और भोजन करने की सख्त मनाही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण के दौरान वर्जित कामों को करने से व्यक्ति के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष नियम का पालन करना चाहिए।
सूर्य या चंद्र ग्रहण को गर्भवती महिलाओं को न देखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक बढ़ जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गर्भवती महिलाओं को ग्रहण क्यों नहीं देखना चाहिए? अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं इसके पीछे की वजह के बारे में। एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों के अनुसार, मातृत्व केवल एक अवस्था नहीं, बल्कि एक नए जीवन का निर्माण है। ग्रहण के नियम डर का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के उत्तम स्वास्थ्य, सुरक्षा और मानसिक संरक्षण का प्रतीक हैं।
क्यों नहीं देखना चाहिए ग्रहण
सुरक्षा और संरक्षण का संदेश- जैसे नाजुक कली को तेज धूप से बचाकर रखा जाता है, वैसे ही गर्भस्थ शिशु को नकारात्मक ऊर्जाओं और हानिकारक किरणों से बचाना हर मां का पहला धर्म है।
परंपरा और विज्ञान का अनूठा मेल
संयम ही सबसे बड़ी ढाल: ग्रहण के समय मां का संयम ही उसके बच्चे की सबसे बड़ी ढाल बनता है। इस समय शांत रहकर ईश्वर का ध्यान करना शिशु के मानसिक विकास के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।
स्वास्थ्य और सुरक्षा: ग्रहण के समय निकलने वाली तरंगों से बचाव रखकर आने वाले शिशु को शारीरिक और मानसिक रूप से सुरक्षित और स्वस्थ बनाया जा सकता है। कब है सूर्य और चंद्र ग्रहण 2026 सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को है। यह ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 4 मिनट से शुरू होगा और 13 अगस्त की रात को 1 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगेगा। इस ग्रहण की शुरुआत सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर होगा। वहीं, इसका समापन 12 बजकर 31 मिनट पर होगा। यह चंद्र ग्रहण भी भारत में नहीं देखा जा सकेगा। इसी वजह से इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसी दिन रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाएगा।







