NMC ने सिम्स बिलासपुर की 150 MBBS सीटों की मान्यता का किया नवीनीकरण, 2026-27 सत्र में प्रवेश का रास्ता साफ

रायपुर  : राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी), नई दिल्ली के स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड (यूजीएमईबी) द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) की 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का नवीनीकरण (लेटर ऑफ रिन्यूअल) जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही आगामी शैक्षणिक सत्र में 150 विद्यार्थियों के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

यह उपलब्धि सिम्स में उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा, आधुनिक आधारभूत संरचना, अनुभवी संकाय तथा मरीजों को प्रदान की जा रही उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमाण है। एनएमसी द्वारा जारी यह नवीनीकरण संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता, गुणवत्ता मानकों के सफल अनुपालन एवं निरंतर प्रगति की राष्ट्रीय स्तर पर पुष्टि करता है।

सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का नवीनीकरण पूरे सिम्स परिवार के लिए गौरव का विषय है। यह संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता, समर्पित शिक्षकों, आधुनिक संसाधनों और उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं को मिली राष्ट्रीय मान्यता है। उन्होंने कहा कि सिम्स को मध्य भारत के अग्रणी चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों को अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ, आधुनिक अधोसंरचना तथा उत्कृष्ट नैदानिक प्रशिक्षण की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।

उन्होंने बताया कि सिम्स चिकित्सालय बिलासपुर संभाग का सबसे बड़ा शासकीय चिकित्सा संस्थान है, जहाँ प्रतिदिन लगभग 2,000 से 2,500 मरीज बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में उपचार के लिए पहुँचते हैं तथा लगभग 900 मरीज विभिन्न वार्डों में भर्ती रहकर उपचार प्राप्त करते हैं। संस्थान में 24 घंटे संचालित ब्लड बैंक, अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर एवं विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी विभागों के माध्यम से उच्चस्तरीय चिकित्सा सेवाएँ प्रदान की जाती हैं। बड़ी संख्या में आने वाले मरीजों के कारण मेडिकल विद्यार्थियों को समृद्ध व्यावहारिक एवं नैदानिक प्रशिक्षण प्राप्त होता है, जिससे वे दक्ष एवं संवेदनशील चिकित्सक बनने की दिशा में तैयार होते हैं। यह मान्यता प्रदेश के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अपने ही राज्य में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करेगी।
उल्लेखनीय है कि सिम्स छत्तीसगढ़ के सबसे पुराने एवं प्रतिष्ठित शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में से एक है। संस्थान में थैलेसीमिया एवं सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित मरीजों को निःशुल्क रक्त एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में संस्थान ने 10,043 यूनिट रक्त संग्रह कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान एवं जनस्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सिम्स निरंतर नए मानक स्थापित कर रहा है तथा प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का यह नवीनीकरण केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार, दक्ष चिकित्सकों के निर्माण और आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button