विकट संकष्टी 2026: इन मंत्रों से मिलेगा सफलता का आशीर्वाद, खत्म होंगी रुकावटें

वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को विकट संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है, जो इस बार 5 अप्रैल को है। माना जाता है कि इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा और व्रत करने से साधक के जीवन के संकट दूर होते हैं। करियर की बाधाएं दूर करने के लिए आप विकट संकष्टी चतुर्थी की पूजा में गणेश जी के मंत्रों का जप कर सकते हैं।
गणेश जी के मंत्र1. गणेश एकाक्षरी मंत्र – गं॥
2. गणेश षडाक्षर मंत्र – ॐ वक्रतुण्डाय हुम्॥
3. गणेश अष्टाक्षर मंत्र – ॐ गं गणपतये नमः॥
4. क्षिप्र प्रसाद गणपति मंत्र – गं क्षिप्रप्रसादनाय नमः॥
5. ऋणहर्ता गणपति मंत्र – ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट्॥
6. हेरम्ब गणपति मंत्र –
ॐ नमो हेरम्ब मदमोहित
मम सङ्कटान् निवारय निवारय स्वाहा॥
7. वक्रतुण्ड गणेश मंत्र –
श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
8. गणेश शुभ-लाभ मंत्र –
ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये।
वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः॥
9. गणेश गायत्री मंत्र –
ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि,
तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
10. श्री महागणपति मूल मंत्र –
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये
वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥
11. हरिद्रा गणपति मंत्र –
ॐ हुं गं ग्लौं हरिद्रा गणपतये वर वरद
सर्व जन हृदयं स्तम्भय-स्तम्भय स्वाहा॥
मंत्र जप की सही विधि
- विकट संकष्टी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
- पूजा स्थल को स्वच्छ करें और गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने गाय के घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
- पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके वज्रासन या सुखासन में बैठ जाएं।
- ध्यान पूर्वक गणेश जी के मंत्रों का जप करें।
- मंत्र जप के लिए आप रुद्राक्ष या फिर हल्दी की माला (हरिद्रा माला) का उपयोग कर सकते हैं।
- मंत्र का उच्चारण स्पष्ट और शांत मन से करना चाहिए।
- आप अपनी श्रद्धा के अनुसार, 21 या 108 बार जप कर सकते हैं।
- मंत्र जप पूर्ण होने पर भगवान गणेश के प्रति आभार व्यक्ति करें और अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।







