बांग्लादेश में चुनाव से पहले बढ़ी हिंसा, उम्मीदवारों-सुरक्षा अधिकारियों को बनाया जा रहा निशाना

 नई दिल्ली : बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव के लिए प्रचार अभियान जैसे-जैसे तेज हो रहा है, देश भर में हिंसा की घटनाएं भी भयावह रूप लेती जा रही हैं। उम्मीदवारों और सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों ने चुनावी प्रक्रिया की शुचिता और सुरक्षा पर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव प्रचार की शुरुआत से ही गोलीबारी, चाकूबाजी और तोड़फोड़ की घटनाओं में कई लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों घायल हुए हैं। फिलहाल, पूरा देश एक डर और अनिश्चितता के माहौल में मतदान की ओर बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें वहां की लोकतांत्रिक बहाली पर टिकी हैं।

बढ़े खूनी संघर्ष

राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच खूनी संघर्ष ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार रात से अब तक पांच जिलों में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़पों में कम से कम 24 लोग घायल हुए हैं। इन घटनाओं में मुख्य रूप से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं के शामिल होने की खबरें हैं।

स्थिति इतनी तनावपूर्ण है कि कई उम्मीदवारों ने अपनी जान का खतरा बताते हुए पुलिस में ‘जनरल डायरी’ (जीडी) दर्ज कराई है और विशेष सुरक्षा की मांग की है। बुनियादी ढांचे को भी पहुंचाया भारी नुकसान हिंसा का दायरा केवल व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी बुनियादी ढांचे को भी बड़े पैमाने पर निशाना बनाया जा रहा है।

उपद्रवियों द्वारा कई निर्वाचन क्षेत्रों में चुनावी कार्यालयों, वाहनों, प्रचार के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले लाउडस्पीकरों और यहां तक कि मतदान केंद्रों पर लगे सीसीटीवी कैमरों को भी नष्ट या लूट लिया गया है। वर्तमान स्थिति से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल अवामी लीग की सरकार के पतन के बाद अंतरिम सरकार के साथ मिलकर काम करने वाले दल अब सत्ता के लिए आपस में ही भिड़ गए हैं।

पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर बढ़ते हमलों ने मतदान के दिन होने वाली सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एनसीपी नेता नसीरूद्दीन पटवारी ने आरोप लगाया है कि उनके कार्यालय पर गोलीबारी की गई और उनके अभियान को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से बाधित किया जा रहा है।

अंतरिम सरकार के संरक्षण से भीड़ हिंसा को बढ़ावा

ढाका में ‘सेंटर फार गवर्नेंस स्टडीज’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का संरक्षण देश में भीड़ हिंसा को बढ़ावा दे रहा है। इसमें वरिष्ठ पत्रकारों और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।

उनका कहना है कि बांग्लादेश में मीडिया की स्वतंत्रता खतरे में है। पत्रकारों को न केवल असुरक्षा और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि राजनीतिक संगठनों का दबाव भी उन पर बढ़ रहा है। कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और प्रेस पर बढ़ते प्रतिबंधों ने लोकतंत्र के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उधर, अमेरिकी सीनेट की इंटेलिजेंस कमेटी के अध्यक्ष मार्क वार्नर ने चुनाव की निष्पक्षता पर संदेह जताते हुए कहा कि अमेरिका की कम होती सक्रियता और घटते लोकतांत्रिक समर्थन के बीच चुनाव की साख को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जो भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भी चिंताजनक है।

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