राजनीतिक संरक्षण टूटा, वर्षों से जमे श्रम निरीक्षक रत्नाकर माटे खैरागढ़ अटैच

राजनांदगांव : लंबे समय से राजनांदगांव श्रम कार्यालय में जमे श्रम निरीक्षक रत्नाकर माटे को आखिरकार शासन ने खैरागढ़ जिले में अटैच कर दिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इस कार्रवाई को प्रशासनिक गलियारों में लंबे समय से लंबित कदम माना जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार श्रम निरीक्षक रत्नाकर माटे के खिलाफ बीते कई वर्षों में कई गंभीर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। बावजूद इसके, कथित तौर पर राजनीतिक पहुंच और संरक्षण के चलते उनके खिलाफ अब तक किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई थी।

नियमों के विपरीत वर्षों तक एक ही स्थान पर जमे रहने से न सिर्फ स्थानांतरण नीति की धज्जियां उड़ीं, बल्कि श्रम कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी लगातार सवाल खड़े होते रहे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निरीक्षण कार्यों में पक्षपात और मनमानी की जाती रही, लेकिन हर बार मामला दबा दिया गया।अब शासन द्वारा खैरागढ़ जिले में अटैच किए जाने को राजनीतिक संरक्षण टूटने और बढ़ते दबाव का नतीजा माना जा रहा है। हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ अटैचमेंट तक सीमित रहेगी या फिर शिकायतों की निष्पक्ष जांच भी की जाएगी।

स्थानीय संगठनों और श्रमिक हित से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि शासन वास्तव में पारदर्शिता चाहता है, तो माटे के कार्यकाल की विस्तृत जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी होगी।फिलहाल श्रम विभाग की इस कार्रवाई से प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज है और अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि आगे कार्रवाई सिर्फ कागज़ों तक सीमित रहती है या ज़मीनी स्तर पर भी असर दिखेगा।

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