दंतेवाड़ा में पूना मारगेम (पुनर्वास से पुनर्जीवन) अभियान से प्रभावित होकर 63 माओवादी कैडर समाज की मुख्यधारा में शामिल

दंतेवाड़ा : जिला दन्तेवाड़ा में पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुन्दरराज पी,पुलिस उप महानिरीक्षक सीआरपीएफ दन्तेवाड़ा रेंज राकेश चौधरी,एसपी दन्तेवाड़ा गौरव राय एवं एएसपी रामकुमार बर्मन के मार्गदर्शन में नक्सल मुक्त बस्तर के संकल्प को परिणीत करने के उद्देश्य से लगातार नक्सल विरोधी अभियान संचालित किया जा रहा हैं।साथ ही छत्तीसगढ़ शासन की ‘‘नक्सल पुनर्वास नीति’’ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दन्तेवाड़ा पुलिस द्वारा ‘‘पूना मारगेम’’ (पुनर्वास से पुनर्जीवन) अभियान संचालित किया जा रहा हैं।जिससे माओवादी संगठन हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति और प्रगति के मार्ग को अपना रहे हैं और समाज के मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं।
इसी तारतम्य में जिला दन्तेवाड़ा में दिनांक 09 जनवरी शुक्रवार को समाज के मुख्यधारा में जुड़ने का संकल्प करके 01 करोड़, 19 लाख, 50 हजार के 36 ईनामी सहित 63 माओवादियों ने आत्मसमर्पण की ईच्छा जाहिर कर दंतेवाड़ा एसपी गौरव राय तथा पुलिस व सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष डीआरजी कार्यालय दन्तेवाड़ा में आत्मसमर्पण किये।आत्मसमर्पित माओवादियों को पुनर्वास नीति के तहत 50 हजार रूपये की सहायता राशि के साथ छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मिलने वाली अन्य सुविधायें जैसे स्किल डेवलपमेंट हेतू प्रशिक्षण कृषि भूमि इत्यादि मुहैया कराई जाएगी।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार और छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर,पिछले 22 माह में दंतेवाड़ा जिला में 201 ईनामी माओवादी सहित कुल 572 से अधिक माओवादियों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर सामाजिक मुख्यधारा को अपनाया हैं।लोन वर्राटू अभियान के तहत अब तक 369 ईनामी माओवादियों सहित कुल 1224 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण जिसमें जिला दन्तेवाड़ा के साथ-साथ सीमावर्ती जिलों बस्तर, सुकमा, बीजापुर एवं नारायणपुर के 962 पुरूष माओवादी तथा 262 महिला माओवादी शामिल हैं।‘‘पूना मारगेम’’ और ‘‘लोनवर्राटू’’ यह संदेश देते हैं कि हर किसी को लौटने का अवसर हैं।दन्तेवाड़ा पुलिस तथा जिला प्रशासन शांति एवं विकास के दोहरे लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध है तथा माओवादियों को संवाद,अवसर और संवेदना के माध्यम से समाज में लौटने का मार्ग देता रहेगा। माओवादियों से यह अपील की गई हैं कि वे हिंसा का मार्ग त्यागें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ें।अपने परिवार,समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझें और शांति,सद्भाव एवं पुनर्वास का मार्ग अपनाएं।

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