अब उन्होंने मंदिर में प्रवेश को लेकर जरूरी बातें बताई हैं। प्रेमानंद जी महाराज का कहना है कि सभी को इनका पालन करना चाहिए। इससे भगवान की कृपा हासिल करना आसान होगा। मानसिक शांति मिलेगी। जिस उद्देश्य के साथ भक्त मंदिर जाते हैं, वह पूरा होगा।
मंदिर में प्रवेश के नियम
- प्रेमानंद महाराज ने मंदिर में कदम रखने से पहले कुछ बातों को ध्यान में रखना चाहिए। आइए जानें वे नियम कौन-से हैं।
- मंदिर में प्रवेश करने से पहले प्रथम सीढ़ी के पैर छूना चाहिए और मौन धारण कर लेना चाहिए। नेत्र भी नीचे रखें। किसी से कोई भी बात नहीं करनी चाहिए।
- सीधे मंदिर में जाएं। अगर मंदिर में आपसे किसी की भी निंदा हो गई या चूक हो गई, तो वज्र का लीक पाप बन जाएगा। मंदिर में किसी का भी दोष ना देखिए।
- मंदिर में भगवान के दर्शन करें, उनसे आंख मिलाएं, नीचे सर झुकाएं और वहां से बाहर हो जाएं। भगवान के जितनी देर दर्शन हो पाएं, उतने ही बहुत हैं।
सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश
हम हमेशा मंदिर इसलिए जाते हैं कि तन और मन पवित्र हो। मंदिर जाने से शरीर में मौजूद नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
स्नान करने के बाद पूरी तरह से पवित्र होकर की मंदिर जाना चाहिए। कहा जाता है कि मंदिर में प्रवेश के बाद से ही सभी बुरी ऊर्जाएं दूर हो जाती हैं। मंदिर में जब भी पूजा की जाती है, सभी भगवान प्रसन्न होते हैं।
बता दें, प्रेमानंद जी महाराज के दरबार मे अनेकों भक्त और याचक अपने सवाल लेकर आते हैं। इन सभी का जवाब प्रेमानंद जी महाराज देते हैं। यह एकांतिक वार्तालाप होता है, जिसमें भक्त खुलकर अपने मन की बात महाराज के सामने रख सकते हैं।
डिसक्लेमर
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