केके रेललाइन पर भूस्खलन से ब्रेक, 35 दिन में 411 करोड़ के माल परिवहन पर असर!

जगदलपुर : छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन ने केके रेललाइन पर रेल यातायात की बहाली का इंतजार बढ़ा दिया है। 24 सितंबर को मल्लीगुड़ा और छत्रिपुत के बीच हुए भूस्खलन के बाद पहले 22 अक्टूबर तक परिचालन बहाल होने की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन अब इसकी समयसीमा बढ़ाकर 28 अक्टूबर कर दी गई है। इससे बस्तर की रेल कनेक्टिविटी सामान्य होने का इंतजार और लंबा हो गया है।
केके रेललाइन बस्तर के औद्योगिक और माल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। इस पर परिचालन प्रभावित होने से मालगाड़ियों की आवाजाही पर भी असर पड़ रहा है। अब निगाहें रेलवे की नई समयसीमा पर टिकी हैं।
35 दिनों में 411 करोड़ रुपये के माल परिवहन का अनुमान
केके रेललाइन से स्थानीय औद्योगिक क्षेत्रों और विशाखापट्टनम रूट पर मालगाड़ियों की आवाजाही होती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मार्ग पर प्रतिदिन करीब 36 मालगाड़ियां चलती हैं। भूस्खलन के कारण परिचालन बाधित होने से माल ढुलाई की व्यवस्था प्रभावित हुई है।
बताया गया है कि किरंदुल और बचेली साइडिंग से निकलने वाली 18 मालगाड़ियों का प्रति ट्रेन किराया करीब 60 लाख रुपये है। वहीं, नगरनार से विशाखापट्टनम जाने वाली मालगाड़ी का किराया लगभग 50 लाख रुपये और आरापुर से जाने वाली मालगाड़ी का किराया करीब 45 लाख रुपये बताया गया है।
इन आंकड़ों के आधार पर 28 अक्टूबर तक की 35 दिनों की अवधि में करीब 411 करोड़ रुपये के माल परिवहन का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, इस आंकड़े को रेलवे के वास्तविक राजस्व नुकसान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह अनुमानित माल परिवहन मूल्य पर आधारित है। वास्तविक आर्थिक प्रभाव का आकलन प्रभावित ट्रेनों की संख्या, परिचालन में व्यवधान और माल ढुलाई की वास्तविक स्थिति के आधार पर ही किया जा सकता है।
बार-बार भूस्खलन से रेल परिचालन प्रभावित
बस्तर की केके रेललाइन पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों से होकर गुजरती है। ऐसे क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं रेल परिचालन के लिए चुनौती पैदा करती हैं। इस मार्ग से खनिज और अन्य औद्योगिक माल विभिन्न केंद्रों तक पहुंचाया जाता है, इसलिए ट्रेनों की आवाजाही बाधित होने का असर माल परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ता है।
24 सितंबर को मल्लीगुड़ा और छत्रिपुत के बीच हुए भूस्खलन के बाद से रेल परिचालन बहाली को लेकर इंतजार जारी है। समयसीमा बढ़ने से क्षेत्र की औद्योगिक गतिविधियों और माल ढुलाई से जुड़े पक्षों की चिंता बढ़ सकती है।
स्थायी सुरक्षा उपायों की जरूरत
रेल परिचालन बहाली की समयसीमा बढ़ने के बाद पहाड़ी हिस्सों को सुरक्षित बनाने का सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है। संवेदनशील ढलानों की निगरानी, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की पहचान और जरूरी सुरक्षा उपायों को मजबूत करना भविष्य में ऐसी घटनाओं से होने वाले व्यवधान को कम करने में मददगार हो सकता है।
फिलहाल, रेल परिचालन बहाल करने के लिए 28 अक्टूबर की समयसीमा बताई गई है। अब देखना होगा कि रेलवे इस तारीख तक ट्रेनों की आवाजाही शुरू कर पाता है या नहीं। साथ ही, बस्तर की इस महत्वपूर्ण रेललाइन को भविष्य में भूस्खलन से सुरक्षित रखने के लिए क्या स्थायी कदम उठाए जाते हैं।







