आश्रम और छात्रावास सुविधा से उच्च शिक्षा की राह हुई आसान, छात्र-छात्राएं गढ़ रहे हैं अपना उज्ज्वल भविष्य

बलौदाबाजार : अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बलौदाबाजार जिले में संचालित आश्रम और छात्रावास विद्यार्थियों के लिए सहारा बन रहे हैं। वर्तमान में जिले के 81 आश्रम एवं छात्रावासों में 3,736 छात्र-छात्राएं रहकर अध्ययन कर रहे हैं।

इन संस्थानों में मिडिल स्कूल से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर तक के विद्यार्थियों को रहने और पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। शासन की ओर से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने के साथ उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

पढ़ाई के साथ मिल रहीं कई सुविधाएं

आदिवासी विभाग के सहायक आयुक्त सूरज दास मानिकपुरी के मुताबिक, जिले में संचालित 81 आश्रम-छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें गार्डन, ओपन जिम, पौष्टिक भोजन, लाइब्रेरी और नियमित स्वास्थ्य जांच जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

विद्यार्थियों को घर से दूर रहते हुए भी शांत और सहज वातावरण मिल सके, इसके लिए छात्रावासों में घर जैसा माहौल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। समय-समय पर उच्च पदों पर पदस्थ अधिकारियों के माध्यम से मोटिवेशनल कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को शिक्षा, करियर और भविष्य को लेकर मार्गदर्शन दिया जाता है।

45 किलोमीटर दूर से कॉलेज आने की परेशानी हुई खत्म

पिछड़ा वर्ग छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रही छात्रा विधि जायसवाल ने बताया कि वह छात्रावास से करीब 45 किलोमीटर दूर ग्राम जारा की रहने वाली हैं। पहले रोजाना कॉलेज आने-जाने में काफी परेशानी होती थी। छात्रावास की सुविधा मिलने के बाद उनके लिए उच्च शिक्षा हासिल करना आसान हो गया है।

विधि के मुताबिक, छात्रावास में पढ़ाई के लिए शांत वातावरण के साथ खेलकूद की सामग्री, ओपन जिम, पौष्टिक भोजन और नियमित स्वास्थ्य जांच जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इन सुविधाओं से पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल रही है।

घर से दूर, लेकिन मिल रहा घर जैसा माहौल

आदिवासी छात्रावास में रहने वाले छात्र अनुज कुमार कंवर ने बताया कि छात्रावास में शासन की ओर से विद्यार्थियों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। घर से दूर होने के बावजूद यहां उन्हें घर जैसा वातावरण मिलता है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने साथियों के साथ शांत और स्वतंत्र माहौल में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

2014 से संचालित छात्रावास में 50 छात्राएं

पिछड़ा वर्ग छात्रावास की अधीक्षिका स्वीटी बाजपेई ने बताया कि छात्रावास का संचालन वर्ष 2014 से किया जा रहा है। यहां विद्यार्थियों के लिए शासन द्वारा निर्धारित मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। वर्तमान में छात्रावास में 50 छात्राएं रहकर उच्च शिक्षा हासिल कर रही हैं।

शिक्षा के साथ भविष्य बनाने का अवसर

आदिवासी छात्रावास की अधीक्षिका मंजुलता उईके ने बताया कि उनका छात्रावास वर्ष 2013 से संचालित है। यहां विद्यार्थियों को शासन द्वारा निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी बेहतर भविष्य का सपना लेकर छात्रावास में आते हैं। यहां उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं और अनुकूल वातावरण का लाभ उठाकर वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सफलता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

इस तरह जिले के आश्रम और छात्रावास आर्थिक या भौगोलिक कारणों से उच्च शिक्षा से दूर रह जाने वाले विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं।

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