रायपुर में मकान तोड़ने के नोटिस पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, गलत नाम पर जारी नोटिस रद्द

बिलासपुर : रायपुर में मकान तोड़ने की कार्रवाई से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने 27 फरवरी 2026 को जारी उस नोटिस को रद्द कर दिया, जो याचिकाकर्ताओं के अनुसार संपत्ति के वास्तविक मालिक के बजाय दूसरे व्यक्ति के नाम जारी किया गया था।
हालांकि, हाईकोर्ट ने नगर निगम को यह स्वतंत्रता दी है कि वह संबंधित संपत्ति के वास्तविक मालिक की पहचान के लिए जांच करे। जांच में यदि निर्माण नियमों के विपरीत या अवैध पाया जाता है, तो निगम कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है।
मठपुरैना के मकान से जुड़ा है मामला
मामला रायपुर के मठपुरैना, वार्ड नंबर 52 स्थित मकान से जुड़ा है। याचिकाकर्ता प्रीति साहू की ओर से अधिवक्ता विकास गुप्ता ने पक्ष रखा।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, उन्होंने 8 सितंबर 2025 को 677 वर्गफीट जमीन खरीदी थी। इसके बाद जमीन का नामांतरण उनके पक्ष में हुआ और इसी जमीन पर मकान का निर्माण कराया गया। उनका कहना था कि संपत्ति का टैक्स भी उनके द्वारा जमा किया जा रहा है।
पति के नाम जारी हुआ मकान तोड़ने का नोटिस
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि नगर निगम ने 27 फरवरी 2026 को धारा 293(1)(II) और 302 के तहत मकान तोड़ने का नोटिस जारी किया था।
हालांकि, यह नोटिस प्रीति साहू के बजाय उनके पति धर्मेंद्र साहू के नाम पर जारी किया गया था।
याचिकाकर्ता का दावा था कि धर्मेंद्र साहू अलग रहते हैं और संबंधित संपत्ति के मालिक या टाइटल होल्डर नहीं हैं। इसके बावजूद उनके नाम नोटिस जारी किया गया, जबकि याचिकाकर्ता को कथित तौर पर नोटिस नहीं दिया गया और अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं मिला।
नगर निगम ने कोर्ट में क्या कहा?
सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से कहा गया कि जांच में यदि यह सामने आता है कि मकान धर्मेंद्र साहू के स्वामित्व में है, तो उनके नाम जारी नोटिस उचित माना जाएगा।
वहीं, यदि जांच में याचिकाकर्ता का दावा सही पाया जाता है और वह वास्तविक मालिक हैं, तो नगर निगम वास्तविक मालिक के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करेगा।
निगम ने यह भी कहा कि संबंधित निर्माण के लिए सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है। ऐसे में जांच के बाद निर्माण अवैध पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने की। कोर्ट ने पाया कि विवादित नोटिस धर्मेंद्र साहू के नाम जारी हुआ था, जबकि याचिकाकर्ताओं का दावा है कि वे न तो संपत्ति के मालिक हैं और न ही उन्होंने निर्माण कराया है।
ऐसी स्थिति में हाईकोर्ट ने 27 फरवरी 2026 के संबंधित नोटिस को रद्द कर दिया।
हालांकि, कोर्ट ने नगर निगम की कार्रवाई पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई। निगम को वास्तविक मालिक की पहचान के लिए जांच करने की स्वतंत्रता दी गई है। यदि जांच में निर्माण अवैध पाया जाता है, तो वास्तविक मालिक या निर्माण के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जा सकती है।
तीन मामलों में जारी आदेश हुए निरस्त
हाईकोर्ट के सामने इसी तरह के कुल तीन मामले आए थे। कोर्ट ने इन याचिकाओं को स्वीकार करते हुए 27 फरवरी 2026 को जारी संबंधित आदेशों को निरस्त कर दिया।
40 मकानों पर चला था बुलडोजर
यह मामला रायपुर के भाठागांव स्थित रावतपुरा कॉलोनी फेस-2 में हुई बुलडोजर कार्रवाई से भी जुड़ा है। यहां करीब 40 मकानों को ध्वस्त किया गया था।
नगर निगम के अनुसार, इन मकानों का निर्माण स्वीकृत लेआउट के बाहर और बिना आवश्यक अनुमति के किया गया था। इनमें से 5 मकानों से जुड़े नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद संबंधित संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व और निर्माण की वैधता को लेकर नगर निगम की आगे की जांच महत्वपूर्ण होगी।







