Bhaum Pradosh Vrat 2026 Date: कब है भौम प्रदोष? नोट कर लें पूजा का शुभ मुहूर्त और जरूरी बातें

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है। हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से भक्तों को महादेव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना की जाती है।

प्रदोष व्रत जिस वार को पड़ता है, उसी के नाम से जाना जाता है। सितंबर 2026 का पहला प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं में भौम प्रदोष को विशेष रूप से कर्ज और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।

आइए जानते हैं भौम प्रदोष व्रत 2026 की तारीख, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व।

 कब है भौम प्रदोष व्रत 2026?

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 8 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजकर 42 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 9 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर होगा।

उदयातिथि और प्रदोष काल को ध्यान में रखते हुए भौम प्रदोष व्रत 8 सितंबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा।

भौम प्रदोष व्रत 2026 शुभ मुहूर्त

भौम प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष शुभ माना जाता है।

प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 6:47 बजे से रात 9:07 बजे तक

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:52 बजे से 5:38 बजे तक

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:11 बजे से 1:01 बजे तक

भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान श्रद्धापूर्वक शिव पूजन, अभिषेक और मंत्र जाप किया जा सकता है।

भौम प्रदोष व्रत का क्या है महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगल ग्रह का एक नाम भौम भी है। मंगल का संबंध साहस, पराक्रम और कर्ज आदि से जोड़ा जाता है। इसलिए मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहा जाता है और इसे कर्ज से मुक्ति की कामना के लिए विशेष माना जाता है।

मान्यता है कि इस दिन मंगल से संबंधित वस्तुओं जैसे गुड़, मसूर की दाल, लाल वस्त्र और तांबा आदि का दान करना शुभ होता है।

कहा जाता है कि त्रयोदशी तिथि की रात के पहले प्रहर में किसी भेंट के साथ भगवान शिव की प्रतिमा के दर्शन करने से महादेव की कृपा प्राप्त होती है।

भौम प्रदोष व्रत करने वाले भक्त भगवान शिव और मंगल देव की कृपा से साहस, आत्मबल और निर्भयता प्राप्त करने की कामना करते हैं। साथ ही यह व्रत आर्थिक परेशानियों और जीवन में आने वाली विभिन्न बाधाओं से मुक्ति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

 भौम प्रदोष पर क्या करें?

भगवान शिव का जल या पंचामृत से अभिषेक करें।

शिवलिंग पर बेलपत्र और पुष्प अर्पित करें।

भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।

प्रदोष काल में शिव परिवार की पूजा करें।

सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को दान करें।

कर्ज से मुक्ति की कामना करते हुए महादेव का ध्यान करें।

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