दुर्गाष्टमी पर ये चीजें चढ़ाने से प्रसन्न होंगी मां दुर्गा! जानें सावन दुर्गाष्टमी की तारीख, मुहूर्त और पूजा सामग्री

प्रत्येक महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गाष्टमी का व्रत किया जाता है। इस दिन मां दुर्गा की उपासना की जाती है। मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत करने और मां भगवती की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामनाओं की पूरी होती है। इसके साथ ही जीवन के सभी दुख दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। सावन मासिक दुर्गाष्टमी के दिन माता दुर्गा को ये खास चीजें चढ़ाने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं कि सावन मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत कब रखा जाएगा और इस दिन मां दुर्गा को क्या-क्या चीजें अर्पित करनी चाहिए।

मासिक दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा को चढ़ाएं ये चीजें

श्रृंगार सामग्री: मासिक दुर्गाष्टमी के दिन माता रानी को लाल रंग की चुनरी चढ़ाएं। इसके साथ ही 16 श्रृंगार की सामग्री (सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, आलता आदि) अर्पित करें। ऐसा करने से अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद मिलता है।

खीर: सावन की दुर्गाष्टमी के दिन मां भगवती को चावल की खीर का भोग लगाएं। खीर चढ़ाने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।

नारियल और अक्षत: मां दुर्गा को सूखा या जटा वाला नारियल अर्पित करें। नारियल चढ़ाने से माता रानी प्रसन्न होती हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

कमल या गुड़हल के फूल: सावन दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा को लाल गुड़हल या कमल के फूल अर्पित करें। ऐसा करने से आर्थिक परेशानियां दूर हो जाती हैं और घर में धन का आगमन होता है।

मासिक दुर्गाष्टमी व्रत 2026 डेट

पंचांग के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 19 अगस्त को शाम 7 बजकर 19 मिनट पर होगा। अष्टमी तिथि का समापन 20 अगस्त को रात 9 बजकर 18 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, सावन दुर्गाष्टमी का व्रत 20 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।

मासिक दुर्गाष्टमी व्रत 2026 शुभ मुहूर्त

मासिक दुर्गाष्टमी के दिन पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 25 मिनट से सुबह 5 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 58 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 55 मिनट से शाम 7 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।

मां दुर्गा के इन मंत्रों का जाप करें

1. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥

2. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै

3. सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

4. ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥

5. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”

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