राहुल गांधी की बढ़ सकती हैं मुश्किलें? विशेषाधिकार शाखा ने भेजे दो नोटिस, 28 अगस्त तक मांगा जवाब

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का मामला अब तूल पकड़ चुका है। लोकसभा सचिवालय की विशेषाधिकार शाखा ने राहुल गांधी को बीजेपी सांसदों द्वारा दिए गए विशेषाधिकार हनन के दो अलग-अलग नोटिसों की प्रतियां भेजी हैं।

सचिवालय ने उन्हें 28 अगस्त 2026 तक इस मामले में अपना लिखित पक्ष और जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। वर्तमान में यह पूरा मामला लोकसभा अध्यक्ष के विचाराधीन है।
​यह सारा विवाद संसद में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चल रही चर्चा के दौरान सामने आया। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य देश में पेपर लीक और परीक्षाओं में होने वाले अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान करना है। चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने सरकार और गृह मंत्री पर तीखा हमला बोला था, जिसे सत्ता पक्ष के नेताओं ने व्यक्तिगत और अपमानजनक करार दिया।

​बीजेपी सांसदों के आरोप और नियम

​बीजेपी सांसद और प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने 29 जुलाई को लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नीतियों की आलोचना का अधिकार सबको है, लेकिन व्यक्तिगत हमले और असंसदीय भाषा का प्रयोग सदन की मर्यादा के खिलाफ है। उन्होंने अपने पत्र में लोकसभा नियमों का हवाला दिया:

​नियम 352: मानहानिकारक या व्यक्तिगत आक्षेप लगाने वाली टिप्पणियों पर रोक।

​नियम 353: सदन की चर्चा से प्रासंगिक आचरण का ही उल्लेख करने से संबंधित प्रावधान।

​नियम 380: अध्यक्ष को अमर्यादित और असंसदीय शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाने का अधिकार।

​नियम 373, 374 और 374ए: सदन में अनुशासनहीनता या बाधा डालने पर की जाने वाली कार्रवाई से जुड़े नियम।

​इसके अलावा, सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने भी 30 जुलाई को राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का एक और नोटिस सौंपा। उन्होंने भी गृह मंत्री के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा को संसदीय मानकों के विपरीत बताया।

​अब आगे की प्रक्रिया क्या होगी?

​लोकसभा सचिवालय के पत्र के अनुसार, राहुल गांधी को 28 अगस्त तक अपना जवाब देना अनिवार्य है। उनके जवाब मिलने के बाद इसे लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष रखा जाएगा। अध्यक्ष के स्तर पर यह तय किया जाएगा कि टिप्पणियां असंसदीय थीं या नहीं और नियमों के अनुसार आगे क्या संसदीय कार्रवाई की जानी चाहिए। राहुल गांधी के आधिकारिक पक्ष के सामने आने के बाद ही इस मामले की अगली दिशा स्पष्ट हो सकेगी।

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