झोलाछाप डॉक्टर के ठिकाने पर छापा, 36 प्रकार की एलोपैथिक दवाइयां जब्त

तखतपुर :  बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम खमरिया में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने कार्रवाई करते हुए बिना वैध औषधि अनुज्ञप्ति के एलोपैथिक दवाइयों का भंडारण किए जाने के मामले में 36 प्रकार की औषधियां जब्त की है। यह कार्रवाई ग्राम स्थित सोमू मेडिकल स्टोर्स के पीछे संचालित क्लीनिक में की गई।

विभागीय कार्रवाई के बाद अवैध औषधि कारोबार के खिलाफ शिकंजा कसने की बात कही जा रही है, वहीं ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित व्यक्ति लंबे समय से यहां इलाज कर रहा था और बड़ी संख्या में लोग उसके पास उपचार के लिए पहुंचते थे।

बिना लाइसेंस मिलीं 36 प्रकार की दवाइयां

जानकारी के अनुसार, नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा बिलासपुर कलेक्टर के निर्देश पर जिले में अवैध औषधि कारोबार के खिलाफ निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के दौरान मिली सूचना के आधार पर खमरिया स्थित क्लीनिक की जांच की गई। जांच के दौरान बीरेन्द्र मलिक के पास बिना वैध औषधि अनुज्ञप्ति के विभिन्न प्रकार की एलोपैथिक दवाइयों का भंडारण पाया गया। टीम ने मौके से 36 प्रकार की औषधियां जब्त कीं। विभाग के अनुसार, बिना वैध अनुज्ञप्ति के इस तरह दवाइयों का भंडारण करना औषधि अधिनियम, 1940 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई के दायरे में आता है।

दवाइयों के नमूने जांच के लिए भेजे जाएंगे

कार्रवाई के दौरान टीम ने मौके पर दवाइयों की जांच की और उन्हें नियमानुसार जब्त किया। विभाग के अनुसार, निर्धारित प्रक्रिया के तहत औषधियों के नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे जाएंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सकरी से आकर किराए के मकान में इलाज करने का दावा

ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति मूल रूप से सकरी क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है और खमरिया में किराए के मकान में रहकर ग्रामीणों का इलाज करता था। ग्रामीणों का दावा है कि यहां लंबे समय से क्लीनिक संचालित किया जा रहा था और आसपास के गांवों से भी लोग इलाज के लिए पहुंचते थे। ग्रामीणों के मुताबिक, यह गतिविधि कथित तौर पर 20 वर्षों से भी अधिक समय से चल रही थी।

20 साल से कथित क्लीनिक चल रहा था तो निगरानी कहां थी?

कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल विभागीय निगरानी को लेकर उठ रहा है। यदि ग्रामीणों के दावे सही हैं और संबंधित स्थान पर लंबे समय से इलाज तथा दवाइयों का कारोबार चल रहा था तो इतने वर्षों तक विभागीय अमले को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई केवल दवाइयों की जब्ती तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ पहले कभी शिकायत हुई थी या नहीं और क्षेत्र में औषधि कारोबार एवं क्लीनिकों की नियमित जांच के दौरान इस गतिविधि पर विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ी।

अधिकारियों के नेतृत्व में हुई कार्रवाई

खाद्य एवं औषधि प्रशासन की यह कार्रवाई सीएमएचओ डॉ. शुभा गरेवाल के मार्गदर्शन, सहायक औषधि नियंत्रक भीष्म देव सिंह के नेतृत्व तथा औषधि निरीक्षक सुनील पंडा द्वारा की गई। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे केवल वैध अनुज्ञप्तिधारी औषधि विक्रेताओं से ही दवाइयां खरीदें। बिना लाइसेंस दवाइयों के भंडारण या विक्रय की जानकारी मिलने पर विभाग को सूचना देने की अपील भी की गई है।

अब आगे की कार्रवाई पर नजर

36 प्रकार की औषधियों की जब्ती के बाद अब सबकी नजर विभाग की आगामी कार्रवाई पर है। दवाइयों के नमूनों की जांच रिपोर्ट के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कथित तौर पर लंबे समय से संचालित बताए जा रहे इस क्लीनिक के संबंध में विभागीय स्तर पर आगे क्या जांच की जाती है।

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