हजारों बेलपत्रों पर भारी है ये एक फूल! सावन में शिवलिंग पर चढ़ाते ही महादेव होते हैं प्रसन्न

सावन के महीने शिव मंदिरों में हर-हर महादेव की गूंज सुनाई देती है। इस दौरान शिवलिंग पर जल चढ़ाने से लेकर फूल और बेलपत्र अर्पित करने तक, हर पूजा सामग्री का अपना महत्व बताया है। शिव जी को कुछ विशेष फूल बेहद प्रिय माने जाते हैं। शिवजी को अर्पित किए जाने वाले कुछ फूल ऐसे भी हैं, जिन्हें हजारों बिल्वपत्र अर्पित करने जितना शुभ और पुण्य फल देने वाला माना गया है। आइए जानते हैं सावन में महादेव को कौन से फूल अर्पित करने चाहिए और उनका क्या महत्व है।

सावन में शिव भक्ति का विशेष महत्व

सावन महीने में शिव भक्त पूरी तरह से शिव की साधना में लीन होते हैं। सनातन धर्म की परंपराओं के अनुसार, मां पार्वती ने भी शिव जी को पति के रूप में पाने के लिये सावन महीने में ही कठोर तप किया था और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया। लिहाजा अच्छे वर की प्राप्ति के लिये इस महीने में भगवान शिव की पूजा-अर्चना जरूर करनी चाहिए।

सावन में कांवड़ यात्रा का भी विशेष महत्व

सावन महीने में ही भगवान शिव के निमित्त कांवड़ भी लाई जाती है, जिसे सावन महीने की शिवरात्रि के दिन उचित विधि-विधान से भगवान शिव के मंदिर में अर्पित किया जाता है। वैसे तो साल भर भगवान शिव की भक्ति की जाती है, लेकिन श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा करने से मनचाही इच्छा जल्द ही पूरी होती है।

शिवजी को प्रिय हैं सफेद फूल

सावन महीने में भगवान शिव को फल, फूल, मेवा आदि का भोग लगाना चाहिए। अगर आप भगवान को फल, फूल, मेवा आदि न भी चढ़ा पाएं तो कोई बात नहीं। आप केवल नित्य रूप से शिवलिंग पर जल चढ़ाएं, तो आपके सारे कार्य पूरे हो जायेंगे। शिव जी को सफेद फूल प्रिय हैं। लिहाजा शिव जी की पूजा में सफेद फूलों का इस्तेमाल करना चाहिए।

हजार बिल्वपत्रों से जितना पुण्य देगा ये फूल

आक का एक फूल शिवलिंग पर चढ़ाने से सोने के दान के बराबर फल मिलता है, लेकिन हजार आक के फूलों की अपेक्षा एक कनेर का फूल और हजार कनेर के फूलों को चढ़ाने की अपेक्षा एक बिल्व पत्र चढ़ाना अधिक पुण्य देने वाला होता है। वहीं, हजार बिल्वपत्रों के बराबर एक द्रोण या गूमा फूल, हजार गूमा फूल के बराबर एक चिचिड़ा यानी लटजीरा, हजार चिचिड़ा के बराबर एक कुश का फूल, हजार कुश के फूलों के बराबर एक शमी का पत्ता, हजार शमी के पत्तों के बराबर एक नीलकमल, हजार नीलकमल से ज्यादा एक धतूरा और हजार धतूरों से भी ज्यादा एक शमी का फूल शुभ और पुण्य देने वाला माना गया है।

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