भाद्रपद माह का अंतिम प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा? नोट कर लें सही डेट और पूजा का शुभ मुहूर्त

uru Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत और शिव आराधना से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

भाद्रपद माह का अंतिम प्रदोष व्रत 24 सितंबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। गुरुवार के दिन पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत या बृहस्पति प्रदोष कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा करना भी शुभ माना जाता है।

आइए जानते हैं गुरु प्रदोष व्रत की सही तारीख, त्रयोदशी तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और इस दिन बनने वाले शुभ योग।

कब है गुरु प्रदोष व्रत 2026?

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 23 सितंबर 2026 की रात 10 बजकर 50 मिनट से शुरू होगी। इसका समापन 24 सितंबर 2026 की रात 11 बजकर 18 मिनट पर होगा।

उदयातिथि और प्रदोष काल के आधार पर गुरु प्रदोष व्रत 24 सितंबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।

गुरु प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त

प्रदोष काल को भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। 24 सितंबर को गुरु प्रदोष की पूजा के लिए प्रदोष काल शाम 6 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 56 मिनट तक रहेगा।

इस दौरान भगवान शिव का अभिषेक, पूजन और आरती करना शुभ माना जाता है।

प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 6:33 बजे से रात 8:56 बजे तक

इसके अलावा दिन में अन्य शुभ मुहूर्त इस प्रकार रहेंगे—

– ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:52 बजे से 5:40 बजे तक
– अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:06 बजे से 12:55 बजे तक

गुरु प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

गुरुवार को पड़ने वाले प्रदोष को गुरु प्रदोष या बृहस्पति प्रदोष कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति, ज्ञान और धर्म के प्रति रुचि बढ़ाने वाला माना जाता है।

देवगुरु बृहस्पति से संबंधित होने के कारण गुरु प्रदोष के दिन व्रत और पूजा को ज्ञान, शिक्षा, धन, धर्म तथा सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की आराधना करने से जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

गुरु प्रदोष पर बनेंगे ये शुभ योग

24 सितंबर को गुरु प्रदोष व्रत के दिन रवि योग का भी संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार रवि योग 24 सितंबर की सुबह 10 बजकर 35 मिनट से 25 सितंबर की सुबह 6 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।

इसके अलावा इस दिन धृति योग भी रहेगा, जो सुबह से दोपहर 3 बजकर 55 मिनट तक रहने की जानकारी दी गई है।

इस तरह भाद्रपद के अंतिम प्रदोष व्रत के दिन त्रयोदशी तिथि के साथ प्रदोष काल और इन शुभ योगों का संयोग रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव की श्रद्धापूर्वक पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।

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