Kokila Vrat Date 2026: 28 जुलाई को रखें कोकिला व्रत, जानें पूजा विधि, कथा और शुभ मुहूर्त

कोकिला व्रत स्त्रियों द्वारा किए जाने वाला एक प्रमुख व्रत है, जो आषाढ़ पूर्णिमा को पड़ता है। ये व्रत भगवान शिव और माता सती को समर्पित है। कुछ क्षेत्रों में ये व्रत आषाढ़ पूर्णिमा से श्रावण पूर्णिमा तक यानी एक माह के लिए रखा जाता है। इस व्रत में स्त्रियां सुबह जल्दी जागकर नदी या जलाशय में स्नान करती हैं। इसके बाद मिट्टी से कोयल की मूर्ति बनाकर उसकी पूजा-अर्चना करती हैं। कहते हैं जो स्त्रियां ये व्रत करती हैं उनके पति को लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। चलिए जानते हैं इस साल ये व्रत कब रखा जाएगा और इसकी पूजा कैसे की जाती है।

कोकिला व्रत कब है 2026

इस साल कोकिला व्रत 28 जुलाई 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। इस व्रत की पूजा का मुहूर्त शाम 07:15 से रात 09:20 बजे तक रहेगा। तो वहीं पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई 2026 की शाम 06:18 से शुरू होकर 29 जुलाई 2026 की रात 08:05 बजे तक रहेगी।

कोकिला व्रत की पूजा विधि

  • इस व्रत की शुरुआत सुबह सूर्य को अर्घ्य देकर की जाती है।
  • इसके बाद देवी पार्वती और भगवान शिव की विधि विधान पूजा की जाती है।
  • ये व्रत निराहार रहकर या एक समय फलाहार ग्रहण करके रखा जा सकता है।
  • इस व्रत की मुख्य पूजा शाम में की जाती है। इस दौरान सुहागिनें कोकिला व्रत की कथा सुनती हैं।
  • पूजा के बाद फलाहार ग्रहण किया जा सकता है।

कोकिला व्रत का इतिहास

कोकिला व्रत की कथा अनुसार, जब भगवान शिव के मना करने पर भी माता सती अपने पिता के यज्ञ में चली गई थी, तब क्रोधित होकर भगवान शिव ने उन्हें कोकिला पक्षी होने का श्राप दे दिया था। कहते हैं इस श्राप के कारण ही माता सती ने 10 हजार साल कोकिला पक्षी के रूप में व्यतीत किए। इसके बाद उन्होंने पार्वती के रूप में जन्म लिया। इसके बाद माता पार्वती ने पूरे विधि-विधान से आषाढ़ मास में ये पावन व्रत किया। कहते हैं इस व्रत के प्रभाव से ही माता पार्वती को भगवान शिव की प्राप्ति हुई। कहते हैं तभी से ये मान्यता है कि जो भी स्त्री इस व्रत को विधि पूर्वक करती है उसे अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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