शादी में दूल्हे को घोड़ी पर क्यों बैठाया जाता है? जानिए सदियों पुरानी परंपरा का असली रहस्य

विवाह को हिंदू धर्म में 16 संस्कारों में से एक माना जाता है। विवाह दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों का पवित्र बंधन माना गया है। विवाह के दौरान कई तरह की रस्में की जाती हैं। हर रस्म का अपना एक विशेष महत्व होता है।एक रस्म ऐसी है, जब घर से बारात निकलती है, तो दूल्हे को घोड़ी पर बैठाया जाता है। अक्सर लोगों में मन में सवाल आता होगा कि आखिर दूल्हे को घोड़ी पर ही बैठाकर बारात क्यों निकली जाती है, तो ऐसे में आइए इस लेख में एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार आपको बताते हैं कि इस रस्म के पीछे की खास वजह के बारे में।

ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, हिंदू धर्म में विवाह के समय दूल्हे का घोड़ी पर बैठना बेहद खास माना जाता है। इसके पीछे गहरे धार्मिक,सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण छिपे हैं:

इंद्रियों पर नियंत्रण का पाठ: घोड़ी को अत्यधिक चंचल, फुर्तीली और बुद्धिमान माना जाता है। जिस तरह एक कुशल सवार अपनी सूझबूझ और नियंत्रण से चंचल घोड़ी को अपने वश में रखता है, ठीक उसी तरह दूल्हे को भी संदेश दिया जाता है कि उसे अपने नए गृहस्थ जीवन में अपनी चंचल इंद्रियों, इच्छाओं और हर परिस्थिति को नियंत्रण में रखना होगा।

उत्पत्ति और नए जीवन का प्रतीक: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य देव की पत्नी ‘संज्ञा’ ने घोड़ी का रूप धारण किया था, जिससे अश्विनी कुमारों का जन्म हुआ। इस नाते सनातन परंपरा में घोड़ी को उत्पत्ति, वंश वृद्धि और एक नए जीवन की शुभ शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है।

शौर्य और वीरता का भाव: इतिहास में योद्धा और राजा-महाराजा युद्ध व विजय अभियानों के लिए घोड़ों का इस्तेमाल करते थे। विवाह के समय दूल्हे का घोड़ी पर सवार होना उसके शौर्य, वीरता और जिम्मेदारी उठाने के साहस को दर्शाता है।

वैसे देखा जाए तो विवाह के दौरान की जाने वाली ये खास परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। प्राचीन समय में क्षत्रियों और राजा-महाराजाओं से यह रस्म शुरू हुई थी। शादी के दिन दूल्हे को भी एक राजा के बराबर माना जाता है, जो अपनी दुल्हन को ब्याह कर अपने घर ले जाने के लिए निकलता है। आज के समय भी यह विवाह के दौरान निभाई जाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button