विघ्नहर्ता की विशेष कृपा का दिन: जून में आ रही विभुवन संकष्टी चतुर्थी, जानें कब होंगे चंद्र दर्शन

सनातन धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देव माना गया है। हर माह आने वाली संकष्टी चतुर्थी का व्रत गणपति बप्पा की कृपा पाने के लिए बेहद खास माना जाता है। ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को विभुवन संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन विधि-विधान से गणेश जी की पूजा और व्रत करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं। साथ ही बप्पा से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस बार चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जिससे इस व्रत का महत्व और बढ़ गया है।

विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 की सही तारीख

पंचांग के अनुसार, अधिकमास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 3 जून 2026 को रात 9 बजकर 21 मिनट से शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 4 जून, गुरुवार को रात 11 बजकर 30 मिनट पर होगा। उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत 3 जून को रखा जाएगा।

सर्वार्थ सिद्धि योग में करें गणेश पूजा

इस साल विभुवन संकष्टी चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 5:28 बजे से लेकर 11:46 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान गणेश की पूजा करने से कार्यों में सफलता मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसके अलावा दिन में विष्कम्भ योग और बाद में प्रीति योग का भी संयोग रहेगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त

व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह 5:23 बजे से 8:51 बजे तक गणेश जी की पूजा कर सकते हैं। इस दौरान लाभ-उन्नति और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त का विशेष संयोग रहेगा। अगर सुबह पूजा संभव न हो तो 10:35 बजे से 12:19 बजे तक शुभ-उत्तम मुहूर्त में भी पूजा की जा सकती है।

चंद्रोदय और अर्घ्य का समय

संकष्टी चतुर्थी व्रत में चंद्र दर्शन और अर्घ्य का विशेष महत्व होता है। 3 जून को चंद्रोदय रात 10 बजकर 04 मिनट पर होगा। श्रद्धालु रात 10:04 बजे से 10:43 बजे के बीच चंद्रमा को अर्घ्य दे सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जल में कच्चा दूध मिलाकर चंद्रदेव को अर्पित करना शुभ माना जाता है।

व्रत के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता जब तक चंद्रमा को अर्घ्य न दिया जाए। इस दिन क्रोध, विवाद और नकारात्मक सोच से दूर रहना चाहिए। साथ ही सात्विक भोजन, ब्रह्मचर्य नियमों का पालन करना शुभ फलदायी माना गया है।

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