भगवान अवलोकितेश्वर की दुर्लभ कांस्य प्रतिमा अब पुन: पहुंचेगी छत्तीसगढ़

महासमुन्द :छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ी रायपुर स्थित महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय से दशकों पहले चोरी हुई भगवान अवलोकितेश्वर की दुर्लभ कांस्य प्रतिमा अब पुन: छत्तीसगढ़ लौटने जा रही है। करीब 19 करोड़ रुपए मूल्य की इस अमूल्य प्रतिमा को अमेरिका द्वारा भारत को लौटाई गई 657 प्राचीन धरोहरों में शामिल किया गया है। प्रतिमा के भारत पहुंचते ही इसे वापस छत्तीसगढ़ लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर इस ऐतिहासिक प्रतिमा को सिरपुर में स्थापित करने की मांग तेज हो गई है। मंदिर महासंघ के प्रमुख संयोजक एवं भारतीय सांस्कृतिक निधि के जिलाध्यक्ष दाऊलाल चंद्राकर ने कहा कि भगवान अवलोकितेश्वर की यह प्रतिमा सिरपुर की सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक है। इसे देश के किसी अन्य संग्रहालय में रखने के बजाय सिरपुर में आधुनिक सुरक्षा एवं संरक्षण व्यवस्था के साथ स्थापित किया जाना चाहिए, ताकि देश-विदेश से पहुंचने वाले पर्यटक, शोधार्थी और इतिहास प्रेमी सिरपुर की समृद्ध बौद्ध विरासत को करीब से जान सकें।आर्थिक प्रकोष्ठ के जिला संयोजक सुमित अग्रवाल ने कहा कि, भगवान अवलोकितेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा को छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक व आध्यात्मिक नगरी सिरपुर में स्थापना से छत्तीसगढ़ के धरोहर की ख्याति देश विदेश मे फैलेगी,साथ ही आध्यात्मिक प्रचार प्रसार को बल मिलेगा।भाजपा जिला प्रवक्ता स्वप्निल तिवारी ने कहा कि, भगवान अवलोकितेश्वर जी छत्तीसगढ़ के आराध्य हैं। भगवान अवलोकितेश्वर जी के प्रतिमा का स्थापना संस्कारधानी सिरपुर में करने से छत्तीसगढ़ के आध्यात्मिक धरोहर व पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

बसना क्षेत्र के युवा नेता जनपद सभापति प्रकाश सिन्हा ने भगवान अवलोकितेश्वर की दुर्लभ कांस्य प्रतिमा की छत्तीसगढ़ वापसी को प्रदेश की सांस्कृतिक अस्मिता और गौरव का ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा सिरपुर की समृद्ध बौद्ध एवं आध्यात्मिक विरासत की पहचान है, इसलिए इसे सिरपुर में ही आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था के साथ स्थापित किया जाना चाहिए, ताकि देश-विदेश के पर्यटक और शोधार्थी छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर से परिचित हो सकें।

श्री गंधेश्वरनाथ महादेव मंदिर ट्रस्ट सिरपुर के ट्रस्टी एवं पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर, शशि शर्मा तुमगांव, नुकेश चंद्राकर महासमुंद, सुखीराम हिरवानी सेनकपाट, थनवार यादव सिरपुर तथा मोहन वर्मा खड़सा ने कहा कि सिरपुर केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि भारतीय पुरातात्विक विरासत का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में यहां के संग्रहालयों और ऐतिहासिक स्थलों को अंतरराष्ट्रीय महत्व के अनुरूप विकसित किया जाना बेहद आवश्यक है। मंदिर महासंघ के संयोजक दानवीर शर्मा, डॉ. नीरज गजेंद्र, ईश्वर सिन्हा, आनंद गोयल और राजेश्वर खरे ने बताया कि यह प्रतिमा वर्ष 1939 में लक्ष्मण मंदिर के समीप मिले कांस्य प्रतिमाओं के विशाल भंडार का हिस्सा थी। बाद में इसे रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया, लेकिन वर्ष 1952 के आसपास यह रहस्यमय ढंग से चोरी हो गई। बाद प्रतिमा की तस्करी कर उसे अमेरिका पहुंचा दिया गया था। अब अमेरिकी प्रशासन द्वारा इसे भारत को सौंपे जाने से प्रदेश में खुशी की लहर है। जानकारी के अनुसार प्रतिमा फिलहाल भारत नहीं पहुंची है। इसके दिल्ली पहुंचने पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और संस्कृति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं इसे रिसीव करेंगे। इस बीच मांगकर्ताओं ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत तथा प्रदेश के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल को पत्र लिखकर प्रतिमा को सिरपुर भेजने का आग्रह किया है।

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