रेप और POCSO मामलों पर सख्ती, राजधानी में बनीं 27 विशेष अदालतें

बिलासपुर :  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बच्चों के शोषण और दुष्कर्म के मामलों की संख्या को देखते हुए विधि विधायी विभाग ने सबसे ज्यादा 4 केंद्र पोषित विशेष अदालतो का गठन किया हैं। ये केवल बच्चों के शोषण से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगी। राजधानी के बाद न्यायधानी बिलासपुर में 2 विशेष अदालतें गठित की गई है।

विधि विधायी विभाग ने पॉक्सो और दुष्कर्म के मामलों में शीघ्र न्याय के लिए छत्तीसगढ़ में 27 विशेष अदालतों के गठन कर दिया है। बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों और बलात्कार के मामलों की जल्द सुनवाई और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने प्रदेश में संचालित होने वाली विशेष अदालतों को नए सिरे से अधिसूचित कर दिया है।

जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य में 27 स्पेशल कोर्ट का गठन कर दिया गया है। बजट के मद्देनजर,राज्य पोषित और केंद्र पोषित दो श्रेणियों में बांटा गया है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सावंत ने दो अलग-अलग अधिसूचना जारी की है। पॉक्सो और दुष्कर्म से संबधित मामलों की सुनवाई करने वाली अदालतों को दो हिस्सों में बांटा गया है।

ये है 12 स्पेशल कोर्ट: बच्चों के यौन अपराध यानी पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों की होगी सुनवाई

बालोद, बलौदाबाजार, भाटापारा, बस्तर (जगदलपुर), धमतरी, कवर्धा (कबीरधाम), कोंडागांव, कोरबा, बेमेतरा, मुंगेली, सारंगढ़ (रायगढ़) और सराईपाली (महासमुंद)।

4 विशेष स्पेशल कोर्ट

इन अदालतों में दुष्कर्म और बच्चों के शोषण दोनों तरह के मामलों की सुनवाई होगी।

स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर होंगे मामले

इस तरह के प्रकरणों को जल्द ट्रांसफर करने का निर्देश जारी किया गया है। हाई कोर्ट प्रशासन की ओर से जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को तत्काल अमल करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। कोरबा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को जिले के दुष्कर्म से जुड़े मामलों को तत्काल कटघोरा की विशेष अदालत में भेजने कहा गया है। रायगढ़ के जिला न्यायाधीश को दुष्कर्म के मामलों को रायगढ़ और घरघोड़ा की विशेष अदालत में भेजने निर्देशित किया गया है।

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