सुकमा में गूंजी गोलियों की जगह तालियां

सुकमा  : कभी जिन पगडंडियों पर डर, बारूद और बंदूकों की गूंज सुनाई देती थी, आज उन्हीं रास्तों पर क्रिकेट के बल्ले की ठक-ठक और युवाओं की तालियों की गूंज सुनाई दे रही है। यह दृश्य केवल एक खेल आयोजन का नहीं, बल्कि सुकमा और पूरे बस्तर के बदलते सामाजिक चेहरे का प्रतीक है। नक्सल हिंसा से लंबे समय तक जूझते रहे नागाराम गांव में आयोजित क्रिकेट टूर्नामेंट ने यह साबित कर दिया कि अब यह इलाका भय के साये से बाहर निकलकर शांति, भरोसे और विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।

सीआरपीएफ 74 वाहिनी के कमांडेंट हिमांशु पांडे के दिशा-निर्देश में नागाराम गांव में बुरकापाल शहीदों की स्मृति में भव्य क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया गया। इसमें अंदरूनी और सुदूर इलाकों की चार टीमों ने भाग लिया। मैदान पर खिलाड़ियों का उत्साह, ग्रामीणों की मौजूदगी और तालियों की गूंज इस बात की गवाही दे रही थी कि बस्तर अब केवल संघर्ष की पहचान नहीं, बल्कि उम्मीद और नए भविष्य की मिसाल बन रहा है।

यह वही सुकमा है, जहाँ कभी नक्सल हिंसा के कारण शाम होते ही सन्नाटा पसर जाता था। बच्चे घरों में सिमट जाते थे, स्कूलों की पढ़ाई बाधित होती थी और युवा असमंजस में जीते थे। नक्सल घटनाओं में शहीद जवानों और निर्दोष ग्रामीणों की यादें आज भी लोगों के मन में ताज़ा हैं। ऐसे माहौल में नागाराम जैसे गांव में क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन अपने आप में ऐतिहासिक कदम है, जो वर्षों के भय और असुरक्षा से बाहर निकलने की सामूहिक कोशिश को दर्शाता है।

इस आयोजन को बुरकापाल शहीदों की स्मृति से जोड़कर सुरक्षाबलों के बलिदान को नमन किया गया। उद्घाटन अवसर पर जवानों, ग्रामीणों और युवाओं ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। कई आंखें नम थीं, क्योंकि सभी जानते हैं कि आज जो शांति दिखाई दे रही है, वह जवानों के सर्वोच्च बलिदान की देन है।

उल्लेखनीय है कि 24 अप्रैल 2017 को सुकमा के अति संवेदनशील बुरकापाल क्षेत्र में माओवादियों के हमले में सीआरपीएफ 74 वाहिनी के 25 वीर जवान शहीद हो गए थे। जवानों ने बहादुरी से मुकाबला किया, लेकिन इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। आज उन्हीं शहीदों की स्मृति में खेल का आयोजन यह संदेश देता है कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया।

टूर्नामेंट में भाग लेने वाली सभी टीमों को सीआरपीएफ 74 वाहिनी की ओर से खेल सामग्री और क्रिकेट जर्सी उपलब्ध कराई गई। नई जर्सी पहनकर मैदान में उतरते खिलाड़ियों के चेहरे पर आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। कई युवाओं ने बताया कि क्रिकेट ने उन्हें नई पहचान और सपने देखने का हौसला दिया है पहले डर लगता था, अब भविष्य दिखता है।

फाइनल मुकाबले में चिंतलनार की टीम ने शानदार प्रदर्शन कर विजेता बनने का गौरव हासिल किया। विजेता टीम को 10 हजार रुपये नगद और ट्रॉफी प्रदान की गई, वहीं उपविजेता केरलपेंदा टीम को 5 हजार रुपये नगद और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। बेस्ट बल्लेबाज और बेस्ट गेंदबाज को भी आकर्षक पुरस्कार दिए गए।

नागाराम का यह क्रिकेट टूर्नामेंट बस्तर के नए अध्याय की शुरुआत है। यह बताता है कि जब युवाओं के हाथ में हथियार की जगह बल्ला होता है, तो भविष्य अपने आप सुरक्षित और उज्ज्वल बनता है। यह आयोजन केवल खेल नहीं, बल्कि शांति की ओर बढ़ते सुकमा और बस्तर का मजबूत संकल्प है जहाँ डर की जगह सपने हैं और हिंसा की जगह खेल।

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