डॉक्टर पति को हाईकोर्ट से झटका, भरण-पोषण मामले में पत्नी के पक्ष में अहम फैसला

बिलासपुर : हाईकोर्ट ने पत्नी और दो नाबालिग बेटियों के भरण-पोषण मामले में फैमिली कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस बीडी गुरु की कोर्ट ने डॉक्टर पति की पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी वर्तमान में बिलासपुर में रहती है तो वह बिलासपुर फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण की याचिका पेश कर सकती है। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल स्थायी पता सारंगढ़ होने के आधार पर बिलासपुर फैमिली कोर्ट के क्षेत्राधिकार को चुनौती नहीं दी जा सकती।

दरअसल, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में रहने वाले एक डॉक्टर और उनकी पत्नी की शादी 16 मई 2019 को हुई थी। उनकी दो बेटियां हैं। पत्नी ने बिलासपुर के फैमिली कोर्ट में बीएनएसएस की धारा 144 के तहत भरण-पोषण का आवेदन दायर करते हुए आरोप लगाया था कि शादी के बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया। पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि पति का अपनी भाभी के साथ अवैध संबंध है। इस संबंध में उसने 29 दिसंबर 2022 को सारंगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत के बाद उसी दिन पति ने उसे और दोनों बच्चियों को घर से निकाल दिया। उसके पास आय का कोई स्रोत नहीं है और दोनों बच्चियां उसके साथ रहती हैं। वहीं पति पेशे से डॉक्टर हैं और कृषि भूमि से भी आय अर्जित करते हैं। पत्नी ने अपने लिए एक लाख रुपए और दोनों बेटियों के लिए 20-20 हजार रुपए प्रतिमाह समेत कुल 1.40 लाख रुपए मासिक भरण-पोषण की मांग की।

डॉक्टर ने फैमिली कोर्ट में आपत्ति लगाते हुए कहा कि विवाह सारंगढ़ में हुआ था और पत्नी भी अपने माता-पिता के घर सारंगढ़ में रह रही है। ऐसे में बिलासपुर फैमिली कोर्ट को मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है। पति ने बताया कि आवेदन दाखिल किए जाने के समय दोनों बच्चियां सारंगढ़ में पढ़ाई कर रही थीं और केवल किरायानामा प्रस्तुत कर बिलासपुर में मामला दायर किया गया है। पति ने खुद को पोलियो से पीड़ित दिव्यांग व्यक्ति बताते हुए कहा कि पत्नी उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से यह मामला चला रही है।

पत्नी ने पति की आपत्तियों का विरोध करते हुए कहा कि उसने कोई फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए हैं। उसने बताया कि वह वर्तमान में बिलासपुर के लगरा क्षेत्र में किराए के मकान में रहती है। उसकी बच्चियां बिलासपुर के एक निजी स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं।

मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पत्नी ने अपने वर्तमान निवास का पता ग्राम लगरा, पोस्ट मोपका, जिला बिलासपुर बताया है। इसके समर्थन में दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं। यदि वह बिलासपुर में निवास कर रही है तो उसे वहां की फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण की याचिका दायर करने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति का स्थायी पता या पैतृक घर किसी अन्य जिले में होने मात्र से उसके वर्तमान निवास वाले क्षेत्र की अदालत का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button