“राजनांदगांव पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा: बस्तर से प्रदेश तक प्रेरणा का सफर”

राजनांदगांव : प्रदेश की पुलिस व्यवस्था में कई नाम आते हैं, लेकिन कुछ अधिकारी अपनी वीरता और कार्यशैली से जनता के दिलों में खास जगह बना लेते हैं। IPS अंकिता शर्मा उनमें से एक हैं, जिन्होंने कॉर्पोरेट की चमकदार नौकरी छोड़कर वर्दी को अपनाया और बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कई सफल अभियानों का नेतृत्व किया। उनकी निडरता और समर्पण ने उन्हें सिर्फ पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि जनता की ‘लेडी सिंघम’ बना दिया। यह रिपोर्ट आपको उनकी मेहनत, साहस और प्रदेश के लिए उनके योगदान से रूबरू कराएगी। कॉर्पोरेट के सुनहरे अवसर ठुकराए… वर्दी और जनता की सुरक्षा को चुना दुर्ग की मूल निवासी IPS अंकिता शर्मा ने अपने छात्र जीवन में हर कदम पर उत्कृष्टता दिखाई। भिलाई स्थित CSVTU से एमबीए में गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद उनके सामने कॉर्पोरेट सेक्टर की बड़ी–बड़ी कंपनियों के आकर्षक प्रस्ताव थे।लेकिन उन्होंने सुरक्षित करियर की राह छोड़कर वह रास्ता चुना
जहां जिम्मेदारी ज्यादा और आराम कम था।

यह फैसला न केवल साहस था, बल्कि प्रदेश के प्रति समर्पण का प्रतीक भी था। दो असफलताएँ मिलीं… पर मन नहीं टूटा, तीसरे प्रयास ने बना दिया छत्तीसगढ़ का गौरव UPSC जैसी कठिन परीक्षा में अंकिता पहली बार मेन्स और दूसरी बार प्रीलिम्स में असफल रहीं।
लेकिन इस मजबूत इच्छाशक्ति वाली अधिकारी ने हार को कभी विकल्प नहीं माना। घर पर सेल्फ-स्टडी, नई रणनीति और अथक परिश्रम के बाद 2018 में तीसरे प्रयास में AIR 203 प्राप्त कर उन्होंने प्रदेश का नाम ऊंचा किया।नक्सल क्षेत्र में निडर नेतृत्व—बस्तर में कई सफल ऑपरेशन IPS बनने के बाद उनका वास्तविक परिचय उनके काम से हुआ।

बस्तर जैसे संवेदनशील और नक्सल प्रभावित इलाकों में अंकिता शर्मा ने कई जोखिमभरे अभियानों का नेतृत्व किया।
साहस, त्वरित निर्णय क्षमता और जमीनी पुलिसिंग— इन तीनों ने उन्हें जनता के बीच एक भीष्म, निडर और लोकप्रिय अधिकारी के रूप में स्थापित किया। इंद्र भूषण अवार्ड और ‘लेडी सिंघम’—प्रदेश की जनता का सम्मान उनकी निर्भीकता और सेवा को देखते हुए उन्हें
प्रतिष्ठित ‘इंद्र भूषण अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। जनता ने उन्हें स्नेह और गर्व से ‘लेडी सिंघम’ नाम दिया— जो केवल उपाधि नहीं, बल्कि प्रदेश के भरोसे का प्रतीक है। युवाओं के लिए संदेश—संघर्ष ही सफलता का असली मार्ग अंकिता शर्मा का सफर प्रदेश के उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिनाइयों से घबराते नहीं, बल्कि उनसे लड़कर आगे बढ़ना चाहते हैं।
उनका संदेश— “सपना कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसे पाने का पहला कदम है—कभी हार न मानना।”

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