निलंबन: मेडिकल बिल क्लियर करने प्रोफेसर से मांगी 30 हजार; महिला लिपिक निलंबित

दुर्ग :  कॉलेज के प्रोफेसर से कॉलेज में ही पदस्थ महिला लिपिक ने मेडिकल बिल क्लियर करवाने के एवज में 30 हजार रूपये रिश्वत की मांग की। रुपए नहीं मिलने पर मिन–मेख निकालती रही। शिकायत के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने महिला लिपिक को निलंबित कर दिया है।

मामला दुर्ग जिले के भिलाई–3 में स्थित शासकीय खूबचंद बघेल महाविद्यालय का है। यहां प्रोफेसर के पद पर प्रोफेसर डॉक्टर श्रीकांत प्रधान पदस्थ हैं। उन्होंने अपनी मां का इलाज करवाने के बाद मेडिकल क्लेम के लिए डेढ़ लाख रुपए का बिल जमा किया था। जिसमें कॉलेज की लिपिक भुवनेश्वरी कश्यप के द्वारा मीन मेख़ निकाल कर बिल क्लियर नहीं किया जा रहा था। बिल को क्लियर करवाने की बजाय लंबा इंतजार करवा दिया गया। बिल क्लियर करवाने के लिए कहने पर बीस फीसदी कमीशन की डिमांड की। चिकित्सा देयक का बिल अमाउंट करीब डेढ़ लाख था जिसका बीस प्रतिशत के हिसाब से तीस हजार रूपए मांगे गए थे।

लिपिक द्वारा जानबूझकर बिल लटकाए जाने और रिश्वत मांगने की शिकायत प्रोफेसर श्रीकांत प्रधान ने संचालक क्षेत्रीय कार्यालय उच्च शिक्षा दुर्ग राजेश पांडे से की थी। मामले की जांच करवाई गई जिसमें लिपिक भुवनेश्वरी श्रीवास को दोषी पाया गया। जिसमें अपर संचालनालय के प्रतिवेदन के अनुसार उच्च शिक्षा संचालनालय ने लिपिक को निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में लिपिक को रायपुर क्षेत्रीय अपर संचालक कार्यालय में अटैच किया गया है।

जिस सहायक ग्रेड एक भुवनेश्वरी कश्यप को निलंबित किया गया है वह पूर्व से भी विवादित रही है। सहायक प्राध्यापकों के साथ दुर्व्यवहार और उनकी डिपॉजिट की राशि भुगतान के लिए एक फ़ीसदी कमीशन मांगने की भी शिकायत मिली थी। पूर्व में चंदूलाल चंद्राकार शासकीय महाविद्यालय धमधा में भी प्राचार्य के साथ असहयोग और बहस की शिकायत थी।

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