जियो जैसी कंपनी को भी चाहिए सस्ती बिजली, टैरिफ बदलने की लगाई गुहार

रायपुर. आम उपभोक्ता अगर सस्ती बिजली की मांग करे ताे बात समझ आती है, लेकिन अरबों रुपए का कारोबार करने और कमाने वाली जियाे जैसी कंपनी भी सस्ती बिजली की मांग करे ताे यह बात गले नहीं उतरती है, लेकिन ऐसा हुआ है, अपने राज्य में बिजली नियामक आयोग में नए टैरिफ के पहले हुई जनसुनवाई में जियाे कंपनी ने गुहार लगाई है कि उसका टैरिफ बदला जाए, क्योंकि जिस गैर घरेलू टैरिफ में उसे रखा गया है, वह टैरिफ महंगा है।
दाे दिनाें तक हुई जनसुनवाई में सबसे अहम टैरिफ में बदलाव न करने की सभी वर्गों ने मांग रखी। इसी के साथ अस्थाई घरेलू कनेक्शनों में भी 400 यूनिट तक बिजली बिल हॉफ करने की मांग की गई। लकड़ी के दरवाजे और फर्नीचर बनाने वालों ने भी अपना टैरिफ गैर घरेलू से बदलकर एलटी 5 उद्योग में किए जाने की मांग की है। कृषि पंपों के खराब मीटर बदलने और फीडरों में भी मीटर लगाने की मांग की गई है।छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनी ने नए सत्र 2023-24 के लिए अपना लेखा-जोखा देकर बिजली का टैरिफ न बढ़ाने की मांग की है। लेकिन इसके बाद भी नियामनुसार बिजली नियामक आयोग ने दो दिनों तक जनसुनवाई करके उपभोक्ताओं को अपना पक्ष रखने का मौका दिया। ऐसे में हर वर्ग के उपभोक्ता आयोग के दफ्तर पहुंचे और अपनी-अपनी मांग रखी।
अस्थाई कनेक्शन पर भी हाे बिजली बिल हाफ
जनसुनवाई में जहां घरेलू उपभोक्ताओं की तरफ से आए उपभोक्ताओं ने कहा, घरेलू बिजली का टैरिफ न बढ़ाया जाए। इसी के साथ अस्थाई कनेक्शनों में 400 यूनिट तक बिजली बिल हॉफ लागू करने की मांग रखी। जियो कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ फर्नीचर उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि मंडल ने आयोग से कहा, हमें गैर घरेलू टैरिफ में रखा गया है, यह टैरिफ बहुत ज्यादा महंगा पड़ता। हम लोग इस टैरिफ में आते भी नहीं हैं। हमें एलटी 5 उद्योग में रखा जाए। इस वर्ग में छोटे और लघु उद्योग भी आते हैं। फर्नीचर उद्योग वालों ने कहा, पहले हमारे उद्योग को एलटी 5 में ही रखा गया था, फिर इसको गैर घरेलू में ला दिया गया। स्टील उद्योगों ने वीसीए न लेने का सुझाव दिया है। इसी के साथ अग्रिम भुगतान करने पर छूट की भी मांग रखी। रेलवे सहित बाकी उद्योगों ने भी टैरिफ में बदलाव न करने की मांग रखी।







