बिहार से कर्नाटक तक कांग्रेस की हार, गठबंधन में बिखराव से कमजोर संगठन तक ये हैं 5 कारण

नई दिल्ली: देश के 4 राज्यों की विधान परिषद सीटों के चुनाव नतीजों ने देश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में हुए इन चुनावों में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। कांग्रेस 28 सीटों पर सिर्फ एक सीट ही जीत पाई। बीजेपी ने अपना दबदबा बनाए रखा, जबकि समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन किया। बिहार में प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी एक सीट जीतने में कामयाब रही। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैलेट पेपर से हुए चुनावों के नतीजों को लेकर कांग्रेस पर तंज कसा है।
यूपी में बीजेपी की 6, सपा की 5 सीटें
उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों पर चुनाव हुए। करीब 36 घंटे की मतगणना के बाद उपलब्ध नतीजों और रुझानों के मुताबिक, बीजेपी को 6 और सपा को 5 सीटें मिलने का अनुमान है। साल 2020 में भी बीजेपी के पास 6 सीटें थीं, जबकि सपा की सीटें 3 से बढ़कर 5 हो गईं। इस तरह बीजेपी को न फायदा हुआ, न नुकसान, लेकिन सपा ने 2 सीटों का फायदा हासिल किया। सपा ने वाराणसी शिक्षक, आगरा शिक्षक और इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर जीत दर्ज की। नतीजों से अखिलेश यादव उत्साहित हैं, लेकिन उन्होंने कार्यकर्ताओं को सावधानी बरतने की सलाह दी। अखिलेश ने कहा कि जोश में होश नहीं खोना चाहिए और जीत का जश्न शांति से मनाना चाहिए। उन्होंने चेताया कि अगर कार्यकर्ताओं ने हुड़दंग किया, तो बीजेपी उनकी जीत को गुंडागर्दी बताने लगेगी।
‘गिनती में गड़बड़ी नहीं होती तो सभी सीटें जीतते’
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मतगणना में गड़बड़ी नहीं होती, तो सपा सभी सीटें जीत सकती थी। उन्होंने गिनती के दौरान हुए विवादों के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किए। आगरा में उन्होंने आरोप लगाया कि सपा उम्मीदवार आकाश अग्रवाल पर हमला किया गया और बीजेपी ने गड़बड़ी करके चुनाव जीतने की कोशिश की। हालांकि, आखिरकार आकाश अग्रवाल ही चुनाव जीत गए। मतगणना के दौरान आकाश धरने पर भी बैठे थे। जीत के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें जनता का भारी समर्थन मिला, इसलिए वह चुनाव जीत पाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने चुनाव में गड़बड़ी करने की कोशिश की। आकाश ने चुनावी माहौल पर चिंता जताते हुए कहा कि विधान परिषद चुनावों की मौजूदा स्थिति देखकर लगता है कि भविष्य में शायद वही पार्टियां उम्मीदवार उतारेंगी, जिनकी सरकार होगी।
वाराणसी की दोनों सीटें सपा के खाते में
वाराणसी की स्नातक और शिक्षक, दोनों विधान परिषद सीटें पहले भी सपा के पास थीं। इस बार भी दोनों सीटों पर सपा की जीत तय बताई गई। मतगणना के दौरान बीजेपी और सपा के एजेंटों के बीच कहासुनी हुई। अखिलेश ने इसे मुद्दा बनाते हुए कहा कि बनारस ने बीजेपी की नाकामी का रोड शो निकाल दिया है और अब नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। सपा नेता उदयवीर सिंह ने भी बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेता इधर-उधर की बातें करते हैं, लेकिन यह नहीं बताते कि वाराणसी में उनकी हार क्यों हुई। उदयवीर ने दावा किया कि वाराणसी में बीजेपी की हार इस बात का संकेत है कि आगामी विधानसभा चुनाव में क्या हो सकता है।
गोरखपुर में करीबी मुकाबला, बीजेपी के ध्रुव त्रिपाठी जीते
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर बीजेपी के ध्रुव त्रिपाठी ने कड़े मुकाबले में जीत दर्ज की। निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव दूसरे स्थान पर रहे। यहां पहली वरीयता के वोटों की गिनती में बीजेपी को बढ़त मिली थी। दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती शुरू होने पर फिर हंगामा हुआ और राजीव यादव मतगणना छोड़कर बाहर निकल गए। अखिलेश यादव ने इस घटना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में बीजेपी नैतिक रूप से हार गई और अगर मतगणना में साजिश नहीं होती, तो यहां भी वाराणसी जैसा नतीजा आता। दूसरी ओर, यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सपा पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी केवल 5 सीटें जीती है, इसलिए ज्यादा उछलने की जरूरत नहीं है। उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा की हवा निकल जाएगी।
बिहार में जनसुराज ने कांग्रेस को दिया झटका
बिहार की 8 विधान परिषद सीटों पर चुनाव हुए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 6 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके थे। बीजेपी ने कोसी स्नातक और तिरहुत शिक्षक सीटें जीतीं। पटना शिक्षक सीट पर राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार को जीत मिली, जबकि सारण शिक्षक सीट निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज के खाते में गई। तिरहुत स्नातक सीट पर निर्दलीय वंशीधर ब्रजवासी जीते। दरभंगा स्नातक सीट पर बीजेपी आगे चल रही थी। बिहार में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा झटका दरभंगा शिक्षक सीट पर लगा, जो पहले उसके पास थी। इस बार प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार ने यह सीट जीत ली। कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला।
पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार की जीत
पटना स्नातक सीट पर जेडीयू के नीरज कुमार ने जीत दर्ज की। बाहुबली नेता अनंत सिंह ने जनसुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह को जिताने के लिए पूरी ताकत लगाई थी। खबरों के मुताबिक, मतगणना शुरू होने से पहले उन्होंने रसगुल्ले भी बनवाकर रखे थे। लेकिन नतीजे नीरज कुमार के पक्ष में आने के बाद जश्न की जगह उनके घर में सन्नाटा छा गया। नीरज कुमार ने अनंत सिंह पर तंज कसते हुए उनकी नकल उतारी और कहा कि बाहुबल वाली रील का अंत हो चुका है। चुनाव प्रचार के दौरान अनंत सिंह ने कहा था कि नतीजे आने पर नीरज कुमार की गैस निकल जाएगी।
नीरज की जीत के बाद उनके समर्थक पुदीना लेकर नाचते दिखे। उन्होंने मजाक में कहा कि अगर अनंत सिंह या उनके समर्थकों को बदहजमी या गैस की परेशानी हो, तो वे नीरज कुमार के घर से पुदीना ले जाएं। हार के बाद अनंत सिंह ने कहा कि जनता ने फैसला दे दिया है और वह इसे स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी पार्टी से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन नीरज कुमार का विरोध जारी रहेगा। इसके बाद वह घर के अंदर चले गए और दरवाजा बंद कर लिया। उन्होंने कहा कि अब उनके सोने का समय हो गया है और वह किसी से बात नहीं करेंगे।
तेजस्वी ने जताई खुशी, बीजेपी ने दिया जवाब
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने पटना शिक्षक सीट पर अपनी पार्टी की जीत पर खुशी जताई। यह सीट साल 2020 में बीजेपी ने जीती थी, लेकिन इस बार आरजेडी के खाते में चली गई। तेजस्वी ने कहा कि पढ़े-लिखे मतदाताओं वाले चुनाव में उनकी पार्टी को कम से कम एक सीट पर जीत मिली है। उन्होंने दावा किया कि अगर चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होते, तो आरजेडी का प्रदर्शन और बेहतर होता। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने तेजस्वी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जिन्हें सफलता नहीं मिलती, वे बहाने बनाते हैं, क्योंकि उनके पास दूसरा विकल्प नहीं होता।
सीएम सम्राट ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने अपनी पार्टी की हार पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अगर उम्मीदवारों का चयन ठीक तरीके से किया गया होता, तो शायद कांग्रेस को यह दिन नहीं देखना पड़ता। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब चुनाव बैलेट पेपर से हुए हैं, तो अब राहुल गांधी अपनी हार का दोष किसे देंगे? उन्होंने कहा कि चुनाव ईवीएम से हों या बैलेट पेपर से, राहुल गांधी की हार तय है, क्योंकि जनता उन्हें पसंद नहीं करती।
महाराष्ट्र में कांग्रेस को 1 सीट पर जीत मिली
महाराष्ट्र में विधान परिषद की 5 सीटों पर चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस को नागपुर में 1 सीट पर जीत मिली। बीजेपी ने पुणे शिक्षक सीट और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने अमरावती शिक्षक सीट जीती। पुणे स्नातक सीट पर शरद पवार के गुट की एनसीपी के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट पर भी शरद पवार गुट के उम्मीदवार की जीत लगभग तय बताई गई।
कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार, फिर भी चारों सीटों पर हार
कर्नाटक के नतीजे कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुए। राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी 4 विधान परिषद सीटों में से एक भी नहीं जीत पाई। बीजेपी ने 3 सीटें जीतीं, जबकि पहले कांग्रेस के पास रही एक सीट जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) ने छीन ली। बेंगलुरु शिक्षक सीट पर जेडीएस उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के उम्मीदवार को हराया। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नतीजों पर तंज कसते हुए कहा कि चुनाव के परिणाम क्या संकेत दे रहे हैं, यह समझदार लोग समझ गए हैं। राहुल गांधी समझेंगे या नहीं, यह कहना मुश्किल है।
‘हार की समीक्षा करेंगे, बैलेट पेपर की मांग जारी रहेगी’
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि कांग्रेस कम से कम 2 सीटें जीतेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पार्टी हार के कारणों की समीक्षा करेगी और जो कमियां रह गई हैं, उन्हें दूर किया जाएगा। जब उनसे पूछा गया कि राहुल गांधी बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करते हैं और इन चुनावों में बैलेट पेपर से मतदान होने के बावजूद कांग्रेस हार गई, तो उन्होंने कहा कि चुनाव में हार-जीत होती रहती है।
डीके शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग जारी रखेगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी नेताओं के साथ बैठकर जनता के संदेश पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उनके मुताबिक, बीजेपी और जेडीएस को इन नतीजों पर जरूरत से ज्यादा खुश नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे पहले उपचुनावों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस एक नवंबर के बाद नया एक्शन प्लान तैयार करेगी।
MLC चुनाव के इन नतीजों का सियासी संदेश क्या है?
कुल मिलाकर, इन चुनावों में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में अपनी सीटें बरकरार रखीं और कर्नाटक में भी बढ़त बनाई। समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 2 सीटों का फायदा हासिल किया। बिहार में जनसुराज ने कांग्रेस से एक सीट छीनी, जबकि आरजेडी ने पटना शिक्षक सीट पर जीत दर्ज की। महाराष्ट्र में महायुति को बढ़त मिली और कांग्रेस को 1 सीट पर जीत मिली। कांग्रेस के लिए इन नतीजों से अपनी रणनीति, उम्मीदवारों के चयन और सहयोगी दलों के साथ तालमेल की समीक्षा करना जरूरी हो गया है। दूसरी ओर, बीजेपी इन नतीजों को राहुल गांधी के चुनावी आरोपों के जवाब के तौर पर पेश कर रही है। अब यह देखना अहम होगा कि इन परिणामों से राजनीतिक दल क्या सबक लेते हैं और आगामी विधानसभा चुनावों में इसका कितना असर पड़ता है।







